जिस विषय में पुनर्मूल्यांकन का आवेदन नहीं, उसमें अंक घटाना गलत: गुवाहाटी हाइकोर्ट

Update: 2026-02-20 07:15 GMT

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस विषय में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं किया गया हो, उस विषय के अंकों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कोई बदलाव नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि किसी विषय के पुनर्मूल्यांकन के दौरान दूसरे विषय के पहले से दिए गए अंक घटाना नियमों के विपरीत है।

जस्टिस नेल्सन सैलो की पीठ ने कहा,

“जब याचिकाकर्ता के पुत्र ने निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल विज्ञान विषय में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया तो यह समझ से परे है कि उस पुनर्मूल्यांकन के दौरान गणित विषय के अंक क्यों घटाए गए। 25.06.2025 के पत्र में भी यह नहीं दर्शाया गया कि पहले दिए गए 13 अंकों को बढ़ाकर 15 अंक करते समय दो अनुग्रह अंक दिए गए। ऐसे में गणित विषय में पहले दिए गए अंकों को बिना किसी आवेदन के इस प्रकार बदलना उचित नहीं है।”

मामला वर्ष 2025 की माध्यमिक परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता का पुत्र विज्ञान और आधारभूत गणित सहित पांच विषयों में सम्मिलित हुआ। विज्ञान में उसे सिद्धांत में 13 और आंतरिक मूल्यांकन में 18 अंक मिले थे कुल 31 अंक, जबकि उत्तीर्ण होने के लिए 33 अंक आवश्यक थे। इससे असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने केवल विज्ञान विषय में ही ऑनलाइन सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया।

अदालत ने उल्लेख किया कि सत्यापन के बाद ऑनलाइन स्थिति में त्रुटि सूचित दर्शाया गया। बाद में संशोधित परिणाम में विज्ञान के सिद्धांत अंक 13 से बढ़ाकर 15 कर दिए गए और स्टूडेंट को डी-2 श्रेणी प्रदान की गई।

हालांकि, संशोधित अंकतालिका डाउनलोड करने पर यह पाया गया कि स्टूडेंट को अब गणित में अनुत्तीर्ण दर्शाया गया जहां उसे सिद्धांत में 13 और आंतरिक मूल्यांकन में 18 अंक कुल 31 अंक दिखाए गए। जबकि पहले वह गणित में उत्तीर्ण घोषित किया गया। यह परिवर्तन उस स्थिति में किया गया जबकि गणित विषय में पुनर्मूल्यांकन के लिए कोई आवेदन नहीं किया गया।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि विज्ञान में अंक बढ़ाने के साथ ही बोर्ड ने गणित के अंक घटा दिए, जो पुनर्मूल्यांकन के आवेदन की सीमा से पूरी तरह बाहर है।

बोर्ड की ओर से कहा गया कि स्टूडेंट को कुल दो ही अनुग्रह अंक मिल सकते थे। चूंकि पहले गणित में अनुग्रह अंक दिए गए, इसलिए पुनर्मूल्यांकन के बाद उन अंकों को विज्ञान में समायोजित किया गया। इसी आधार पर गणित के अंक घटाए जाने को उचित ठहराया गया।

अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए बोर्ड को निर्देश दिया कि वह आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से एक माह के भीतर विज्ञान विषय में पुनर्मूल्यांकन करे लेकिन गणित विषय में किसी प्रकार का परिवर्तन न करे, क्योंकि उसके लिए कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि परिशिष्ट-3 के अनुसार मूल अंकतालिका ही मान्य मानी जाएगी। हालांकि विज्ञान विषय में पुनर्मूल्यांकन के बाद आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं।

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