MBBS पूरा करने के बाद केवल लंबित आपराधिक मुकदमे के आधार पर डिग्री प्रमाणपत्र नहीं रोका जा सकता: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी छात्र के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने मात्र के आधार पर उसका मूल अंतिम MBBS उत्तीर्ण प्रमाणपत्र अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता खासकर तब जब उसने पाठ्यक्रम, अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी कर ली हो और सक्षम प्राधिकारी से पंजीकरण भी प्राप्त कर लिया हो।
जस्टिस बुद्धि हाबुंग ने कहा कि जब तक किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का न्यायिक निर्णय नहीं हो जाता, तब तक केवल मुकदमे के लंबित रहने को प्रमाणपत्र रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
मामला वालिया मुर्शिदा हुडा की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने अपना मूल अंतिम MBBS उत्तीर्ण प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2010 में असम मेडिकल कॉलेज, डिब्रूगढ़ में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था।
बाद में राज्य सरकार के आदेश के तहत उन्हें और अन्य छात्रों को पढ़ाई जारी रखने और पाठ्यक्रम पूरा करने की अनुमति दी गई।
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2011 में MBBS की पढ़ाई पूरी की और 2012 में अनिवार्य एक वर्षीय इंटर्नशिप भी पूरी की। इसके बाद उन्होंने पंजीकरण के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके निर्देश पर उन्हें असम चिकित्सा पंजीकरण परिषद से अंतिम पंजीकरण भी मिल गया। इसके बावजूद उन्हें मूल MBBS डिग्री प्रमाणपत्र नहीं दिया गया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला अभी भी विचाराधीन है और मुकदमा साक्ष्य के चरण में है। 42 गवाहों में से केवल 10 की ही गवाही हुई तथा अब तक कोई दोषसिद्धि नहीं हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि समान परिस्थितियों वाले अन्य छात्रों को पहले ही उनके मूल प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता को पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी गई उन्होंने सफलतापूर्वक MBBS पाठ्यक्रम और इंटर्नशिप पूरी की तथा उन्हें विधिवत पंजीकरण भी प्रदान किया गया।
अदालत ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि संबंधित अधिकारियों ने उनकी योग्यता और पाठ्यक्रम पूर्ण करने को स्वीकार किया।
अदालत ने कहा कि प्रमाणपत्र रोके जाने का एकमात्र कारण उनके प्रवेश से जुड़े मामले में लंबित आपराधिक मुकदमा है। हालांकि ऐसी स्थिति में भी केवल मुकदमे के लंबित रहने के आधार पर प्रमाणपत्र रोकना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि असम मेडिकल कॉलेज, डिब्रूगढ़ के प्राचार्य सहित संबंधित अधिकारी आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर याचिकाकर्ता को उनका मूल अंतिम MBBS उत्तीर्ण प्रमाणपत्र जारी करें यदि वह पहले से जारी नहीं किया गया हो।
साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के पंजीकरण संबंधी विवरण संबंधित नियामक प्राधिकरण के अभिलेखों में अपडेट किए जाएं।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रमाणपत्र जारी करने और उनकी योग्यता को मान्यता देने का यह आदेश संबंधित आपराधिक मामले के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा। यदि सक्षम अदालत भविष्य में कोई अलग आदेश पारित करती है, तो उसके अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार की।