PMLA के तहत 'Reason to Believe' गोपनीय है या प्रभावित व्यक्ति को देना होगा? गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मामला बड़ी पीठ को भेजा
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न बड़ी पीठ के समक्ष भेज दिया है कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 5(1) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अस्थायी कुर्की आदेश (Provisional Attachment Order-PAO) जारी करने से पहले दर्ज किए जाने वाले 'Reason to Believe' क्या गोपनीय होते हैं या उन्हें प्रभावित व्यक्ति को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
जस्टिस मनीष चौधरी ने कहा कि यदि अधिकृत अधिकारी द्वारा लिखित रूप में दर्ज किए गए 'Reason to Believe' को PAO का हिस्सा बनाया जाता है, तो इससे आदेश में कोई अधिकार क्षेत्र संबंधी त्रुटि नहीं आती। कोर्ट की राय थी कि ऐसे कारणों को प्रभावित व्यक्ति को उपलब्ध कराना प्राकृतिक न्याय और निष्पक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होगा।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि हाईकोर्ट की समन्वय पीठ ने Aftabuddin Ahmed v. Enforcement Directorate (2024) में इसके विपरीत राय व्यक्त करते हुए कहा था कि 'Reason to Believe' गोपनीय होते हैं और उन्हें प्रभावित व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए। इसी विरोधाभास को देखते हुए कोर्ट ने मामले को बड़ी पीठ के समक्ष भेजने का निर्देश दिया।
मामला ईडी द्वारा धन शोधन मामले में याचिकाकर्ता की तीन भूमि संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने के आदेश को चुनौती देने से संबंधित है। कोर्ट ने कहा कि यदि 'Reason to Believe' को पूरी तरह गोपनीय मान लिया जाए तो प्रभावित व्यक्ति यह जान ही नहीं सकेगा कि उसकी संपत्ति किन आधारों पर कुर्क की गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा।