यासीन मलिक के दावों पर NIA का दिल्ली हाईकोर्ट में जवाब: सहानुभूति पाने की कोशिश अपराध से कोई संबंध नहीं

Update: 2026-04-22 11:06 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक के उन दावों को खारिज किया, जिनमें उन्होंने विभिन्न सरकारों के साथ कार्य संबंध होने की बात कही थी। एजेंसी ने कहा कि यह केवल जनसहानुभूति हासिल करने का प्रयास है और इससे उनके अपराध पर कोई असर नहीं पड़ता।

NIA ने अपने जवाब में कहा,

“सीनियर नेताओं, मीडिया कर्मियों और नौकरशाहों के नाम लेना केवल लोकप्रियता और सहानुभूति पाने के लिए है। इसका इस मामले के गुण-दोष से कोई लेना-देना नहीं है।”

मलिक ने दावा किया कि वर्ष 1990 से लेकर कई सरकारों के दौरान वह संवाद प्रक्रिया का हिस्सा रहे और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलने के लिए प्रेरित किया गया।

हालांकि, NIA ने इन दावों को सिरे से नकारते हुए कहा कि केवल नाम लेने से आरोपी अपने खिलाफ लगे गंभीर आरोपों से मुक्त नहीं हो सकता। एजेंसी के अनुसार मलिक के कई आतंकी संगठनों से संबंध रहे हैं और वह प्रतिबंधित संगठनों के समर्थकों के संपर्क में थे।

NIA ने यह भी कहा कि मलिक पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में थे और इन संपर्कों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ प्रचार और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए किया गया।

एजेंसी ने अदालत को बताया कि मलिक को आरोप तय होने के समय और सजा से पहले अपनी आपत्तियां रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया लेकिन उन्होंने तब ऐसा नहीं किया। अब लगभग तीन साल बाद इस तरह के दावे करना कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है।

मामले की सुनवाई जस्टिस नवीन चावला की पीठ के समक्ष हुई, जहां NIA की ओर से दायर जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया गया। अदालत ने इसे मलिक को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जो जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में ट्रायल कोर्ट ने यासीन मलिक को आतंकवाद के वित्तपोषण और देश के खिलाफ साजिश के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब NIA हाईकोर्ट में उनके लिए मृत्युदंड की मांग कर रही है।

मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई।

Tags:    

Similar News