Unnao Custodial Death: 'फर्जी' कैंसर पर्चियों के आरोप के बीच दिल्ली हाइकोर्ट ने AIIMS से जयदीप सेंगर की स्वास्थ्य जांच कराने को कहा

Update: 2026-02-26 08:51 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने उन्नाव प्रकरण में दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मृत्यु मामले में दोषी ठहराए गए जयदीप सिंह सेंगर के स्वास्थ्य की स्वतंत्र जांच के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। जयदीप सेंगर, उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी कुलदीप सेंगर का भाई है।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की खंडपीठ जयदीप सेंगर की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने मेडिकल आधार पर सजा के अंतरिम निलंबन की मांग की।

जयदीप सेंगर ने दावा किया कि वह गंभीर और जानलेवा बीमारियों से पीड़ित है, जिनमें चौथे चरण का मुख कैंसर, उसके दोबारा उभरने की आशंका, अस्थि-रेडियोनेक्रोसिस, मुंह खुलने में गंभीर कठिनाई और जबड़े का दीर्घकालिक संक्रमण शामिल हैं।

हालांकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अदालत को बताया कि सेंगर द्वारा दाखिल कई मेडिकल दस्तावेज फर्जी प्रतीत होते हैं। एजेंसी ने कहा कि पूर्व उपचार से संबंधित कुछ अभिलेख सत्य पाए गए, लेकिन वर्तमान में चौथे चरण के कैंसर से पीड़ित होने का कोई विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

इन परिस्थितियों में हाइकोर्ट ने कहा कि सेंगर की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का निष्पक्ष और स्वतंत्र आकलन आवश्यक है। अदालत ने एम्स के निदेशक को निर्देश दिया कि वे विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड गठित करें, जो जयदीप सेंगर की समग्र जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

पीठ ने बोर्ड से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या सेंगर को कैंसर या कोई अन्य जानलेवा बीमारी है। यदि है तो उसका चरण क्या है। साथ ही यह भी बताया जाए कि आवश्यक उपचार जेल अस्पताल में संभव है या उसे सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा के साथ ले जाकर उपचार देना होगा।

अदालत ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि सेंगर को मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाए और उसके सभी उपलब्ध मेडिकल अभिलेख बोर्ड को उपलब्ध कराए जाएं। सेंगर को अपनी पूर्व मेडिकल इतिहास संबंधी दस्तावेज भी बोर्ड के समक्ष रखने की अनुमति दी गई।

मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च को निर्धारित की गई।

उल्लेखनीय है कि 3 जुलाई, 2024 को हाइकोर्ट ने जयदीप सेंगर को मेडिकल आधार पर दो माह के लिए अंतरिम जमानत दी। 13 मार्च, 2020 को ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सेंगर और जयदीप सेंगर को पीड़िता के पिता की हिरासत में मृत्यु के मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इससे पहले 20 दिसंबर 2019 को कुलदीप सेंगर को वर्ष 2017 में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

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