सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल कोर्सेज में दाखिले से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तमिलनाडु की सभी खाली सुपर स्पेशियलिटी सीटें राज्य को वापस लौटा दी जाएंगी। हालांकि पात्रता के लिए निर्धारित प्रतिशत में कितनी कमी की जाएगी इस पर सरकार मंगलवार तक कोर्ट को लिखित जानकारी देगी।

जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष गुरुवार को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र का रुख बताया। उन्होंने कहा कि सरकार तमिलनाडु की जितनी सीटें खाली रह गई हैं, वे सभी राज्य को वापस देगी।

भाटी ने कहा कि पात्रता प्रतिशत में कितनी कमी की जाए इस पर अभी फैसला होना बाकी है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि सरकार की ओर से मंगलवार तक इस संबंध में लिखित जानकारी दी जाएगी।

यह मामला तमिलनाडु में सेवा में कार्यरत डॉक्टरों के लिए आरक्षित सुपर स्पेशियलिटी की 151 खाली सीटों से जुड़ा है। तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग की थी कि इन सभी खाली सीटों को राज्य सरकार को वापस किया जाए।

इससे पहले 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि यदि दूसरे चरण की काउंसलिंग के बाद राज्य पात्रता प्रतिशत कम करने का फैसला करता है, तो सेवा में कार्यरत उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 151 खाली सीटों में से केवल 50 प्रतिशत सीटें ही राज्य को वापस की जाएं।

इसके बाद एसोसिएशन ने इस आदेश में संशोधन की मांग करते हुए 100 प्रतिशत खाली सीटें तमिलनाडु को लौटाने का अनुरोध किया था।

24 अगस्त को हुई सुनवाई में केंद्र की ओर से बताया गया था कि तमिलनाडु द्वारा दी गई 151 सीटों में से करीब 40 सीटें खाली रह गई। इस पर एसोसिएशन की ओर से सीनियर एडवोकेट पी. विल्सन ने सभी 40 सीटें राज्य को लौटाने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि करीब 111 उम्मीदवार पात्रता प्रतिशत कम किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

गुरुवार को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि केंद्र ने सभी खाली सीटें तमिलनाडु को लौटाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि पात्रता प्रतिशत घटाए जाने के बाद भी जो सीटें राज्य नहीं भर पाएगा, उन्हें भी वापस राज्य को दे दिया जाएगा।

राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और एसोसिएशन की ओर से पी. विल्सन ने केंद्र के इस रुख की सराहना की। उनका कहना था कि ये सीटें तमिलनाडु के कोटे की हैं और इसलिए इन्हें राज्य को वापस जाना ही चाहिए।

हालांकि केंद्र ने यह स्पष्ट किया कि इससे मामले का व्यापक कानूनी मुद्दा खत्म नहीं होता। भाटी ने कहा कि सुपर स्पेशियलिटी कोर्सेज में आरक्षण दिया जा सकता है या नहीं, यह सवाल अभी सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है।

केंद्र का रुख है कि सुपर स्पेशियलिटी में किसी भी तरह का आरक्षण नहीं होना चाहिए, जिसमें सेवा में कार्यरत डॉक्टरों के लिए आरक्षण भी शामिल है।

तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन की अर्जी उस लंबित याचिका में दाखिल की गई, जिसमें राज्य में सेवा में कार्यरत डॉक्टरों के लिए निर्धारित 151 खाली सुपर स्पेशियलिटी सीटों का मुद्दा उठाया गया।

एसोसिएशन का कहना है कि ये सीटें राज्य के सेवा में कार्यरत डॉक्टरों के 50 प्रतिशत आरक्षण वाले कोटे का हिस्सा हैं। यह व्यवस्था 7 नवंबर 2020 के सरकारी आदेश के तहत लागू की गई, जिसकी संवैधानिक वैधता सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम भारत संघ मामले में बरकरार रखी थी।

एसोसिएशन के अनुसार अखिल भारतीय स्तर पर सीटें खाली रहने से बचाने के लिए इन सीटों को अस्थायी तौर पर महानिदेशालय स्वास्थ्य सेवाएं को दिया जाता है। इससे महानिदेशालय को इन सीटों पर कोई स्थायी अधिकार नहीं मिलता।

एसोसिएशन ने यह भी दलील दी है कि पहले भी खाली सीटें राज्यों को वापस की जाती रही हैं। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में अखिल भारतीय कोटे की दूसरे चरण की काउंसलिंग के बाद बची सभी 58 सीटें तमिलनाडु को वापस कर दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने 2022 से तमिलनाडु को सुपर स्पेशियलिटी सीटों में 50 प्रतिशत सेवा-में-कार्यरत डॉक्टरों का कोटा जारी रखने की अनुमति दी है। जून में कोर्ट ने 151 खाली सुपर स्पेशियलिटी सीटों को अखिल भारतीय योग्यता सूची के माध्यम से भरने का निर्देश दिया।

इसके बाद तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने यह अर्जी दाखिल की और राज्य के मेडिकल कॉलेजों की इन खाली सीटों को अखिल भारतीय कोटे में सौंपने से रोकने की मांग की।

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