सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल ले जाने की अनुमति, लगातार मेडिकल निगरानी जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

Update: 2026-07-21 08:47 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में ट्रांसफर करने की अनुमति दी।

अदालत ने कहा कि डॉक्टरों की राय के अनुसार उनकी लगातार मेडिकल निगरानी आवश्यक है क्योंकि वह लंबे समय से अनशन पर हैं।

चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो की अपील पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें वांगचुक को निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति देने से इनकार किया गया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने एम्स, सफदरजंग अस्पताल और वांगचुक के निजी डॉक्टरों की रिपोर्ट और राय पर विचार किया। इसके बाद पीठ ने कहा कि सभी डॉक्टरों की राय लगभग एक जैसी है कि उनकी स्थिति में लगातार मेडिकल निगरानी जरूरी है।

अदालत ने कहा,

"रिपोर्टों और डॉक्टरों से बातचीत के बाद यह स्पष्ट है कि लगातार निगरानी आवश्यक है। डॉ. टंडन की राय है कि उन्हें अस्पताल में निगरानी में रखा जाना चाहिए। वांगचुक द्वारा लिखे गए पत्र में व्यक्त चिंताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसलिए हम उन्हें उनकी पसंद के मेदांता अस्पताल भेजने का प्रस्ताव रखते हैं।"

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार को वांगचुक को मेदांता अस्पताल भेजे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि वांगचुक मेडिकल सलाह के विपरीत अस्पताल से छुट्टी न लें।

इसके बाद अदालत ने संकेत दिया कि वांगचुक को मेदांता अस्पताल भेजा जाएगा और सफदरजंग अस्पताल में उनके उपचार से संबंधित सभी मेडिकल रिकॉर्ड और रिपोर्ट वहां उपलब्ध कराई जाएंगी।

सुनवाई के दौरान एम्स और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि वांगचुक के यूरिक अम्ल (uric acid) का स्तर बढ़ा हुआ है श्वेत रक्त कणिकाओं (low white blood cell) की संख्या कम है और हीमोग्लोबिन भी सामान्य से नीचे है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया।

डॉ. टंडन ने अदालत को बताया,

"उनकी संक्रमण से लड़ने की क्षमता काफी प्रभावित हुई है। प्लेटलेट्स भी कम हैं और इसकी जांच जरूरी है। वह कैलोरी नहीं ले रहे हैं। यूरिक अम्ल बढ़ना मांसपेशियों के क्षय का संकेत है। उपवास के दौरान कई बदलाव सामान्य हो सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ सामान्य है। उनकी लगातार निगरानी जरूरी है।"

वांगचुक की ओर से सीनियर एडवोकेट अखिल सिब्बल ने दलील दी कि उनके निजी डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल उनके जीवन को तत्काल कोई खतरा नहीं है और अनशन स्थल पर भी उनकी नियमित मेडिकल निगरानी की जा रही थी।

सुनवाई के दौरान सिब्बल ने वांगचुक द्वारा लिखे गए एक पत्र का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने सफदरजंग अस्पताल में पुलिस की मौजूदगी, फोन इस्तेमाल पर पाबंदियों और निगरानी को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं।

गौरतलब है कि 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। वह कथित नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में अनशन पर बैठे थे।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को उनके स्वास्थ्य की प्रतिदिन जांच सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर उचित उपचार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।

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