जिला अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था लगातार समीक्षा के दायरे में रहे: दिल्ली हाईकोर्ट, स्वतः संज्ञान मामला बंद

Update: 2026-04-02 11:06 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी की सभी जिला अदालतों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अहम निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस इन व्यवस्थाओं को जारी रखे और समय-समय पर उनकी समीक्षा भी करे। इसके साथ ही अदालत ने स्वतः संज्ञान से शुरू किए गए मामले को समाप्त किया।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय, जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस नितिन वासुदेवो सांबरे की पूर्ण पीठ ने यह आदेश पारित किया।

अदालत ने निर्देश दिया,

“जिला अदालतों में लागू की गई सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी और पुलिस अधिकारी संबंधित जिला एवं सेशन जजों के साथ मिलकर इसकी नियमित समीक्षा करेंगे।”

यह मामला 7 फरवरी को तीस हजारी कोर्ट परिसर में हुई एक घटना से जुड़ा था, जिसमें एक वकील के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। इस घटना के बाद हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुलिस ने सभी जिला अदालतों की सुरक्षा का आकलन किया और जहां जरूरत थी, वहां अतिरिक्त बल तैनात किया गया।

अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि इस घटना से जुड़े दोनों पक्षकारों की शिकायतों पर FIR दर्ज की गईं और जांच पूरी हो चुकी है। फाइनल रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश की जाएगी।

हाईकोर्ट ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट दाखिल होने के बाद संबंधित पक्षों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़ित वकील को दी गई सुरक्षा जारी रखी जाए और खतरे के आकलन की समीक्षा के आधार पर आगे निर्णय लिया जाए।

बार काउंसिल की ओर से बताया गया कि संबंधित वकीलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया और उन्हें सुनवाई का अवसर भी दिया गया। अदालत ने निर्देश दिया कि यह प्रक्रिया अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाई जाए।

अंत में हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्वतः संज्ञान मामला अब अपना उद्देश्य पूरा कर चुका है और इसे जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि इससे अदालतों में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित होगा।

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