थोड़ा भरोसा रखिए: स्टूडेंट एक्टिविस्ट से कथित प्रताड़ना मामले में फिलहाल CBI जांच से दिल्ली हाइकोर्ट का इनकार
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्टूडेंट एक्टिविस्ट और सोशल एक्टिविस्टों की कथित अवैध हिरासत एवं प्रताड़ना के मामले में फिलहाल CBI जांच के आदेश देने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू हो चुकी है और इस प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेज़ा की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर गौर किया, जिसमें बताया गया कि मार्च महीने में विभिन्न स्टूडेंट एक्टिविस्टों और सोशल एक्टिविस्टों के साथ कथित प्रताड़ना और अवैध हिरासत के आरोपों को लेकर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की गई।
अदालत ने कहा कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त ने संयुक्त पुलिस आयुक्त, दक्षिणी रेंज को जांच का जिम्मा सौंपा है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जांच शुरू होने के बाद संयुक्त पुलिस आयुक्त की ओर से कुछ कार्रवाई भी की गई।
मामले की सुनवाई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर हो रही थी, जिन्हें विभिन्न कार्यकर्ताओं ने दायर किया। इससे पहले भी हाइकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जांच के दौरान कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की मौखिक सलाह दी थी।
दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सरकारी वकील संजीव भंडारी ने अदालत को बताया कि जांच शुरू कर दी गई है और उसे पूरा होने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच से संबंधित सभी विवरण अदालत के समक्ष रखे जाएंगे।
इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंजाल्विस ने CBI जांच की मांग दोहराई।
इस पर अदालत ने टिप्पणी की,
“थोड़ा भरोसा रखिए। यदि शुरुआती चरण में ही हर जांच एजेंसी पर अविश्वास जताया जाएगा तो फिर CBI पर भी सवाल उठेंगे। वह भी एक एजेंसी ही है।”
अदालत ने आगे कहा,
“कल को यदि किसी जज के खिलाफ आरोप लगें, तब क्या यह कहा जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट जांच न कराए क्योंकि वह भी उसी व्यवस्था का हिस्सा है?”
इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई के लिए निर्धारित की।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को चेतावनी दी थी कि यदि आवश्यक हुआ तो CBI जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। हालांकि दिल्ली पुलिस ने प्रताड़ना के आरोपों से इनकार किया था, लेकिन यह भी कहा था कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर पर जांच कराई जाएगी।
दिल्ली पुलिस ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि वह 13 कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित माओवादी और नक्सली विचारधाराओं के समर्थन के आरोपों की सक्रिय जांच कर रही है।