जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट बंद करने को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती, आदेश सार्वजनिक करने की भी मांग

Update: 2026-07-24 11:51 GMT

NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

जनहित याचिका में इंटरनेट बंद करने के केंद्र सरकार के आदेशों को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें रद्द करने और भविष्य में ऐसे सभी आदेश सार्वजनिक करने की मांग की गई।

यह जनहित याचिका सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर, इंडिया (SFLC.IN) ने दायर की।

मामले का शुक्रवार सुबह चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया।

अदालत ने मामले को उसी दिन सूचीबद्ध करने की अनुमति दी लेकिन याचिका में तकनीकी खामियां होने के कारण उस पर सुनवाई नहीं हो सकी।

याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय के 17, 20, 22 और 23 जुलाई के उन आदेशों को चुनौती दी गई, जिनके तहत छात्र प्रदर्शनों के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित की गई थीं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इन आदेशों में केवल लोक आपातस्थिति और लोक सुरक्षा जैसे कानूनी शब्दों का उल्लेख किया गया लेकिन इंटरनेट बंद करने की आवश्यकता और उसके आधार से जुड़ी कोई ठोस सामग्री सामने नहीं रखी गई।

याचिका में कहा गया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 के अनुसार इंटरनेट बंद करने का निर्णय आवश्यकता, अनुपातिकता और कम प्रतिबंधात्मक विकल्पों पर विचार करने के बाद ही लिया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में इन कानूनी मानकों का पालन नहीं किया गया।

याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि इंटरनेट बंद करने के आदेश सार्वजनिक नहीं किए गए, जिससे प्रभावित लोगों के लिए उन्हें अदालत में चुनौती देना मुश्किल हो गया।

याचिका में कहा गया कि यह सुप्रीम कोर्ट के अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले के भी विपरीत है, जिसमें ऐसे आदेशों को सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई कि इंटरनेट बंद करने के सभी संबंधित आदेश रद्द किए जाएं और इस संबंध में मूल अभिलेख, फाइल टिप्पणियां, खुफिया सूचनाएं तथा समीक्षा समिति की कार्यवाही भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

साथ ही भविष्य में इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने से जुड़े सभी आदेश लागू करने से पहले या उसी समय सार्वजनिक करने का निर्देश भी देने की मांग की गई।

Tags:    

Similar News