सिर्फ़ हाइपरटेंशन को 'लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर' कहना एयर फ़ोर्स कर्मियों को डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करने के लिए काफ़ी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि हाइपरटेंशन जैसी बीमारी को सिर्फ़ "लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर" बताकर एयर फ़ोर्स कर्मी को डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करना काफ़ी नहीं है, खासकर तब जब क्लेम को खारिज करने वाली मेडिकल राय के पीछे कोई ठोस कारण न हो।
जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीज़न बेंच ने कहा,
"लाइफ़स्टाइल हर व्यक्ति की अलग-अलग होती है। इसलिए सिर्फ़ यह कहना कि बीमारी एक लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर है, डिसेबिलिटी पेंशन देने से मना करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता, जब तक कि मेडिकल बोर्ड ने संबंधित व्यक्ति से जुड़ी ज़रूरी बातों की ठीक से जांच न की हो और उन्हें रिकॉर्ड न किया हो।" (ज़ोर दिया गया)
कोर्ट भारत सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) के 3 अगस्त, 2023 के एक आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश में प्रतिवादी, जो भारतीय वायु सेना के एक पूर्व सदस्य थे और 37 साल से ज़्यादा सेवा पूरी करने के बाद कम मेडिकल कैटेगरी में सेवा से डिस्चार्ज हुए थे, उनको डिसेबिलिटी पेंशन देने का निर्देश दिया गया।
अधिकारियों ने पेंशन का दावा इस आधार पर खारिज किया कि हाइपरटेंशन "इडियोपैथिक/लाइफ़स्टाइल से संबंधित डिसऑर्डर" का नतीजा था और यह सैन्य सेवा के कारण नहीं हुआ या उससे बढ़ा नहीं था।
केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि AFT का आदेश गलत था, क्योंकि उसने 'सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए कैज़ुअल्टी पेंशनरी अवार्ड्स के लिए पात्रता नियम, 2008' पर विचार नहीं किया, जिसके बारे में उन्होंने तर्क दिया कि यह सैनिक के पक्ष में सामान्य अनुमान को खत्म करता है।
हालांकि, ट्रिब्यूनल ने कर्मी को राहत देते हुए 'प्राइमरी हाइपरटेंशन' के लिए 30% पर आंकी गई पेंशन के डिसेबिलिटी एलिमेंट को 50% तक बढ़ाने का निर्देश दिया।
AFT के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने UOI बनाम हवलदार राम कुमार मामले में अपने हाल के फैसले पर भरोसा किया और दोहराया कि डिसेबिलिटी पेंशन एक लाभकारी प्रावधान है, जिसे सेवा कर्मियों के पक्ष में उदारतापूर्वक समझा जाना चाहिए।
बेंच ने कहा कि लागू 2008 के पात्रता नियमों के तहत, यह नियोक्ता की ज़िम्मेदारी है कि वह ठोस कारण देकर यह साबित करे कि बीमारी न तो सेवा के कारण हुई और न ही उससे बढ़ी।
कोर्ट ने कहा,
"यह माना हुआ मामला है कि इंडियन एयर फ़ोर्स में अपॉइंटमेंट के समय उन्हें कोई डिसेबिलिटी नहीं थी... यह कहना ही काफी है कि हाइपरटेंशन की डिसेबिलिटी का पता लगाते समय, रिलीज़ मेडिकल बोर्ड ने अपने इस नतीजे के सपोर्ट में कोई कारण नहीं बताया कि प्राइमरी हाइपरटेंशन की डिसेबिलिटी मिलिट्री सर्विस से जुड़ी नहीं थी। इसने डिसेबिलिटी को लाइफस्टाइल से जोड़ने का भी कोई कारण नहीं बताया।"
इसलिए कोर्ट ने डिसेबिलिटी पेंशन देने के फैसले को सही ठहराया और केंद्र सरकार की अपील खारिज की।
Case title: UoI v. 627281 EX MWO (HFO) Tejpal Singh