शराब नीति मामला: केजरीवाल समेत सभी आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए समय, 2 अप्रैल को अगली सुनवाई
दिल्ली शराब नीति मामले में दिल्ली हाइकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।
बता दें, यह याचिका विशेष अदालत द्वारा दिए गए कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने (एक्सपंज) की मांग से जुड़ी है।
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने आरोपियों के वकीलों के अनुरोध पर उन्हें अतिरिक्त समय दिया और मामले को 2 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
सुनवाई के दौरान ED की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू और विशेष वकील जोहेब हुसैन उपस्थित हुए। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपियों को पहले ही याचिका की प्रति दी जा चुकी है और जवाब के लिए समय मांगना केवल कार्यवाही में देरी करने का प्रयास है।
इस पर अदालत ने कहा,
“आप एक हफ्ता और ले लीजिए। अगर वे कुछ कहना चाहते हैं तो कहने दीजिए। 2 अप्रैल को हम सुनवाई करेंगे और फिर अंतिम आदेश पारित करेंगे।”
ED ने अपनी याचिका में कहा कि स्पेशल कोर्ट ने ने उसके खिलाफ कुछ टिप्पणियां बिना सुने ही कर दीं, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। एजेंसी का कहना है कि वह CBI की कार्यवाही का हिस्सा नहीं थी, फिर भी उसके खिलाफ टिप्पणियां कर दी गईं।
ED ने यह भी दलील दी कि यदि ये टिप्पणियां बनी रहती हैं तो इससे उसकी चल रही जांच और कार्यवाही पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और यह न्यायिक अतिक्रमण (ज्यूडिशियल ओवररीच) का मामला है।
गौरतलब है कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और के. कविता समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। उस आदेश में अदालत ने कहा था कि केवल चुनावी फंडिंग या खर्च से जुड़े आरोपों के आधार पर आपराधिक जांच शुरू नहीं की जा सकती, जब तक कोई स्पष्ट आपराधिक अपराध सामने न आए।
अब हाइकोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि क्या ट्रायल कोर्ट की ये टिप्पणियां हटाई जानी चाहिए या नहीं।