जमानत की शर्तों में परिवार की निजता से खिलवाड़ नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी की निगरानी का आदेश किया रद्द
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत की शर्तें आरोपी के परिवार के सदस्यों की निजता में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। अदालत ने आरोपी की पत्नी की निगरानी से जुड़े ट्रायल कोर्ट के निर्देशों को रद्द किया।
जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि कानून केवल आरोपी या दोषी व्यक्ति पर ही शर्तें लगाने की अनुमति देता है, न कि उसके परिवार के सदस्यों पर।
मामला एक आरोपी को उसकी पत्नी के ऑपरेशन के लिए दी गई अंतरिम जमानत से जुड़ा था। ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते समय कुछ सख्त शर्तें लगाई थीं, जिनमें पुलिस को आरोपी की पत्नी के साथ महिला पुलिसकर्मी तैनात करने उसके फोटो लेने, रहन-सहन की जांच करने पड़ोसियों के बयान दर्ज करने और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) जुटाने के निर्देश शामिल थे।
हाईकोर्ट ने इन शर्तों को निजता पर गंभीर और अस्वीकार्य हस्तक्षेप बताया खासकर इसलिए, क्योंकि आरोपी की पत्नी इस मामले में आरोपी नहीं थी।
अदालत ने कहा,
“जमानत देते समय अदालत केवल आरोपी पर ही उचित शर्तें लगा सकती है परिवार के सदस्यों पर नहीं।”
हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत बरकरार रखते हुए उसकी अवधि 1 अप्रैल से तीन सप्ताह तक बढ़ा दी। साथ ही सामान्य शर्तें लागू की गईं, जैसे जमानत बांड देना यात्रा पर प्रतिबंध और गवाहों को प्रभावित न करना।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी आत्मसमर्पण के समय अपनी पत्नी के इलाज से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करे।