[JEE Mains] IIT में एडमिशन के लिए तय योग्यता शर्तों की जगह सहानुभूति नहीं ले सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में एडमिशन के लिए तय योग्यता शर्तों की जगह सहानुभूति या पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी संभावित मुश्किलों को नहीं रखा जा सकता।
जस्टिस जसमीत सिंह ने JEE की उम्मीदवार की याचिका खारिज की। उम्मीदवार ने JEE मेन 2025 परीक्षा के मूल्यांकन में कथित गलतियों के आधार पर IIT दिल्ली में एडमिशन की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए हाईकोर्ट सिर्फ़ कथित मुश्किलों के आधार पर परीक्षा और एडमिशन के मौजूदा नियमों से हटकर एडमिशन का कोई दूसरा तरीका नहीं अपना सकता।
कोर्ट ने कहा,
"....सिर्फ़ सहानुभूति या किसी व्यक्ति की मुश्किल, किसी एकेडमिक अथॉरिटी को मौजूदा नियमों या मानकों से अलग हटकर काम करने का निर्देश देने का आधार नहीं बन सकती।"
कोर्ट ने आगे कहा:
"कोर्ट इस बात को समझता है कि याचिकाकर्ता ऐसा एकेडमिक मौका बचाना चाहती है, जो उसके अनुसार, उसके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण हाथ से निकल गया। हालांकि, सहानुभूति या पढ़ाई-लिखाई से जुड़े नुकसान की संभावना, IIT में एडमिशन के लिए तय योग्यता शर्तों को पूरा करने का विकल्प नहीं हो सकती। कोर्ट को मौजूदा नियमों को एक समान रूप से लागू करना होता है, जब तक कि उनसे अलग हटकर काम करने का कोई कानूनी रूप से सही आधार न हो।"
याचिकाकर्ता उम्मीदवार - आशी अग्रवाल - JEE मेन 2025 में शामिल हुईं और उन्होंने पांच सवालों के मूल्यांकन में गड़बड़ी का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि कुछ अंक गलत तरीके से रोक लिए गए और अगर गलतियों को सुधारा जाता तो उन्हें JEE एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई करने के लिए ज़रूरी परसेंटाइल मिल जाता।
उन्होंने JEE मेन 2025 सेशन II से बाहर किए जाने को भी चुनौती दी। उनका आरोप था कि वह गेट बंद होने के समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंच गईं, लेकिन उन्हें अंदर जाने की इजाज़त नहीं दी गई। इसलिए उम्मीदवार ने एक अतिरिक्त (सुपरन्यूमरेरी) सीट बनाकर IIT दिल्ली में एडमिशन का निर्देश देने की मांग की।
हालांकि, कोर्ट ने गौर किया कि मांगी गई राहत में कई तरह की संभावित घटनाएं शामिल थीं - गलत मूल्यांकन की धारणा से शुरू होकर, अंकों और परसेंटाइल में बढ़ोतरी, JEE एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई करना और आखिर में IIT में एडमिशन।
कोर्ट ने कहा,
"ऐसी संभावित घटनाओं की कड़ी IIT में एडमिशन के लिए अनिवार्य निर्देश का आधार नहीं बन सकती।"
कोर्ट ने यह भी कहा कि रिट अधिकार क्षेत्र अपील करने जैसा नहीं होता है। आम तौर पर यह सबूतों की दोबारा जांच नहीं करता या तथ्यों से जुड़े विवादित सवालों पर फैसला नहीं सुनाता, खासकर तब जब विवाद में तकनीकी विशेषज्ञता की ज़रूरत हो।
कोर्ट ने देखा कि NTA के इलेक्ट्रॉनिक ऑडिट लॉग, जवाबों के मूल्यांकन, मार्क्स और एक काल्पनिक परसेंटाइल की गणना के बारे में याचिकाकर्ता के आरोपों की तथ्यात्मक और तकनीकी जांच की ज़रूरत होगी।
कोर्ट ने JEE Main 2025 में याचिकाकर्ता के प्रदर्शन के आधार पर 2026 एकेडमिक सेशन में एडमिशन का दावा भी खारिज किया।
कोर्ट ने गौर किया कि JEE Advanced 2026 के लिए योग्यता मानदंडों के तहत उम्मीदवार का 2025 या 2026 में कक्षा XII की परीक्षा में शामिल होना ज़रूरी है और याचिकाकर्ता इस ज़रूरी योग्यता मानदंड को पूरा नहीं करती।
सुपरन्यूमरेरी सीट (अतिरिक्त सीट) बनाने की याचिका पर कोर्ट ने कहा कि IIT में एडमिशन व्यवस्थित, मेरिट-आधारित ढांचे के तहत होते हैं, जिसमें योग्यता मानदंड, थ्रेशोल्ड, प्रयास और सीटों की एक तय संख्या शामिल होती है।
कोर्ट ने कहा,
"सुपरन्यूमरेरी सीट बनाना, खासकर बहुत ज़्यादा कॉम्पिटिटिव और मेरिट-आधारित एडमिशन प्रक्रिया में, रिट याचिका दायर करने से मिलने वाली कोई आम राहत नहीं मानी जा सकती।"
कोर्ट ने आगे कहा,
"इन हालात में याचिकाकर्ता अब 2025 में दी गई परीक्षा के नतीजे के आधार पर 2026 एकेडमिक सेशन में सीट पर एडमिशन चाहती है। मेरी राय में ऐसी राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि JEE (Main) 2025 का नतीजा 2026 के अगले एकेडमिक सेशन में एडमिशन का आधार नहीं बन सकता।"
Case Title : MS. ASHI AGARWAL v. UNION OF INDIA & ORS