दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस भरत पाराशर की खंडपीठ ने कहा कि आयु में छूट देने वाली कोई कार्यकारी अधिसूचना MCD जैसी स्वायत्त संस्था के अलग भर्ती नियमों (Recruitment Rules) को दरकिनार नहीं कर सकती, जब तक कि उसे खुद उन नियमों या भर्ती विज्ञापन में शामिल न किया गया हो।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता (आवेदक) का जन्म 27.04.1982 को हुआ था और वह अनारक्षित (Unreserved) श्रेणी से संबंधित है। वह 2012 से DoE, GNCTD के साथ अतिथि शिक्षक (Guest Teacher) के रूप में काम कर रही थी। दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) ने MCD स्कूलों में शिक्षक (प्राथमिक) के पद के लिए एक विज्ञापन जारी किया। MCD में शिक्षक (प्राथमिक) के पद के लिए भर्ती नियम 2011 में बनाए गए थे, जिनमें अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष तय की गई।

आवेदक ने 'दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम, 1973' के नियम 43 के तहत DoE द्वारा 01.11.1980 को जारी अधिसूचना का हवाला दिया। इस अधिसूचना में दिल्ली के स्कूलों में शिक्षकों के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए महिला उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में 10 साल की सामान्य छूट दी गई।

आवेदक ने 10 साल की आयु छूट का लाभ पाने के लिए ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। ट्रिब्यूनल ने DSSSB को निर्देश दिया कि वह उसे चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे। उसने लिखित परीक्षा दी और 123.01 अंक प्राप्त किए। उसे अपना ई-डोजियर (E-Dossier) अपलोड करने के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया, जबकि अनारक्षित श्रेणी के लिए कट-ऑफ 117.52 अंक थी।

बाद में सक्षम प्राधिकारी द्वारा 01.11.1980 की अधिसूचना वापस ले ली गई। इसके बाद, DSSSB ने आवेदक को आयु में छूट के अपने दावे से संबंधित प्रमाण पत्र जमा करने के लिए कहा।

ट्रिब्यूनल ने माना कि MCD की भर्ती अलग भर्ती नियमों द्वारा शासित होती है और 01.11.1980 की अधिसूचना का उपयोग इस तरह नहीं किया जा सकता कि वह उस पद पर लागू भर्ती नियमों को ही दरकिनार कर दे। ट्रिब्यूनल के आदेश से असंतुष्ट होकर, आवेदक ने रिट याचिका दायर करके दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

आवेदक की ओर से यह तर्क दिया गया कि 01.11.1980 की अधिसूचना को 06.03.2020 तक वापस नहीं लिया गया और 26.06.2018 के विज्ञापन की तारीख को भी यह अधिसूचना लागू थी। यह भी कहा गया कि उन्होंने 123.01 अंक प्राप्त किए और उन्हें अपना ई-डोसियर (E-Dossier) अपलोड करने के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। उन्होंने 'अनारक्षित' (Unreserved) श्रेणी में अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक अंक प्राप्त किए।

इसके अलावा, यह तर्क दिया गया कि 06.03.2020 को अधिसूचना वापस लेने का निर्णय उस अधिकार को पीछे की तारीख से (Retrospectively) खत्म नहीं कर सकता, जो उन्हें विज्ञापन की तारीख और चयन प्रक्रिया में भाग लेने की तारीख को मिल चुका था।

'रिचा मिश्रा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य व अन्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया कि महिला उम्मीदवारों को आयु में छूट देने वाला प्रावधान, बाद में बने भर्ती नियमों (Recruitment Rules) से हटा दिए जाने के बावजूद लागू रहेगा, यदि वह पुराना प्रावधान पहले से ही प्रभावी था।

इसके साथ ही 'गौरी शर्मा बनाम शिक्षा निदेशालय' (Directorate of Education) मामले के फैसले का भी हवाला दिया गया। इसमें यह तर्क दिया गया कि चूंकि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के समय 01.11.1980 की अधिसूचना लागू थी, इसलिए बाद में इसे वापस लेने के आधार पर आयु में छूट का लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह भी कहा गया कि आवेदक ने इस पद के लिए निर्धारित सभी शैक्षिक योग्यताएं पूरी कीं। इसलिए केवल उम्र के आधार पर उनकी उम्मीदवारी को खारिज नहीं किया जाना चाहिए, खासकर तब जब वह पहले ही चयन प्रक्रिया में भाग ले चुकी हैं।

न्यायालय के निष्कर्ष और टिप्पणियां

डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की कि नगर निगम (Municipal Corporations) संवैधानिक व्यवस्था के तहत काम करते हैं और ये स्वायत्त निकाय (Autonomous Bodies) होते हैं। भारतीय संविधान के भाग IX-A के तहत नगर निगम स्थानीय स्वशासन का एक अलग स्तर बनाते हैं। यह भी ध्यान दिया गया कि MCD (नगर निगम) अपने स्वयं के वैधानिक ढांचे और सेवा शर्तों से संचालित होता है, जिसमें संबंधित पद के लिए लागू भर्ती नियम भी शामिल हैं।

इसके अलावा, यह भी देखा गया कि केवल 01.11.1980 की अधिसूचना के मौजूद होने से ही यह साबित नहीं हो जाता कि यह MCD के अलग भर्ती नियमों (Recruitment Rules) के तहत होने वाली भर्ती पर लागू होगी।

'दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) और अन्य बनाम सतीश कुमार मीना' के मामले का हवाला दिया गया, जिसमें भर्ती नोटिस में ही विभागीय उम्मीदवारों के लिए आयु में छूट का एक विशेष प्रावधान था। यह छूट उन उम्मीदवारों के लिए थी, जिन्होंने दिल्ली सरकार (GNCTD) में कम से कम तीन साल तक लगातार सेवा की हो। इसी संदर्भ में कोर्ट ने कहा कि MCD, GNCTD (दिल्ली सरकार) के अंतर्गत एक स्थानीय निकाय (Local Body) है।

'दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड और अन्य बनाम सीमा कपूर' के मामले का भी हवाला दिया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नगर निगम (Municipal Corporation) एक कानून के तहत स्थापित स्वायत्त निकाय (Autonomous Body) है। इसलिए इसका कोई कर्मचारी खुद को सरकारी कर्मचारी या विभागीय उम्मीदवार मानकर आयु में छूट का दावा नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती नियमों के तहत पदोन्नति (Promotion) का रास्ता होने का मतलब यह नहीं है कि नगर निगम का कर्मचारी, सीधी भर्ती (Direct Recruitment) के लिए 'विभागीय उम्मीदवार' बन जाएगा।

बेंच ने यह भी कहा कि किसी विशेष कानूनी या नियामक संदर्भ में जारी किया गया कोई प्रशासनिक निर्देश (Executive Instruction), दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में होने वाली हर भर्ती पर अपने आप लागू नहीं हो सकता। खासकर तब, जब संबंधित पद के लिए अलग भर्ती नियम लागू हों।

डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी विशेष नियामक ढांचे के तहत जारी प्रशासनिक निर्देश में दी गई आयु में छूट, किसी दूसरे संस्थान के अलग भर्ती नियमों पर हावी नहीं हो सकती।

इसके अलावा, यह भी कहा गया कि केवल MCD को GNCTD का स्थानीय निकाय बताने भर से, 1980 की अधिसूचना के तहत मिलने वाली 10 साल की छूट MCD की भर्ती पर लागू नहीं हो जाएगी। ऐसा तब तक नहीं हो सकता, जब तक कि इस छूट को लागू करने का कोई स्पष्ट प्रावधान न हो।

डिवीजन बेंच ने निष्कर्ष निकाला कि MCD में शिक्षक (प्राथमिक) के पद पर भर्ती के लिए आवेदक 01.11.1980 की अधिसूचना के तहत मिलने वाले लाभ का दावा नहीं कर सकता।

इन टिप्पणियों के साथ डिवीजन बेंच ने ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा। परिणामस्वरूप, आवेदक द्वारा दायर रिट याचिका को डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया।

Case Title : Poonam Patwal vs. Government of NCT of Delhi and Others

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