दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला खिलाड़ियों को गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी पर संरक्षण देने वाली नीति बनाने की मांग को लेकर पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर मंगलवार को नोटिस जारी किया।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने कुश्ती महासंघ सहित संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।

मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

विनेश फोगाट ने जुलाई 2025 में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था। उनकी ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव ने अदालत के समक्ष कहा कि याचिका केवल व्यक्तिगत राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला खिलाड़ियों से जुड़े व्यापक नीतिगत सवाल को उठाती है।

उन्होंने कहा कि गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद खेल में लौटने वाली महिला खिलाड़ियों की खेल में भागीदारी और उनकी रैंकिंग पर इसका असर पड़ता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व अवकाश लेने वाली महिला खिलाड़ियों को रैंकिंग सहित कई मामलों में संरक्षण दिया जाता है।

अदालत ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ समेत संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती महासंघ की ओर से जारी किए गए दो कारण बताओ नोटिसों को भी अलग याचिका के जरिए चुनौती दी। ये नोटिस उनके खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही से संबंधित हैं।

इस याचिका पर सुनवाई के दौरान राव ने कहा कि हाईकोर्ट ने पहले महासंघ को शुरुआती कारण बताओ नोटिस पर फैसला करने का निर्देश दिया, लेकिन अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया।

महासंघ की ओर से पेश वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुनवाई के लिए दो बार तारीख तय की गई, लेकिन दोनों बार याचिकाकर्ता पक्ष उपस्थित नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि अब अंतिम अवसर दिया गया और सुनवाई अगले दिन होनी है।

इस पर राव ने कहा कि उनकी आपत्ति यह है कि महासंघ ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया कि अनुशासनात्मक समिति में कौन लोग शामिल हैं।

अदालत ने इस पर भारतीय कुश्ती महासंघ को आवश्यक निर्देश लेने को कहा और इस मामले को 29 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

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