खुशी कपूर के अश्लील कंटेंट और अनधिकृत सामान की बिक्री पर दिल्ली हाईकोर्ट का सख्त आदेश

Update: 2026-08-12 08:02 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस खुशी कपूर से संबंधित सोशल मीडिया पर प्रसारित अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने उनकी पहचान और व्यक्तित्व से जुड़े तत्वों का अनधिकृत इस्तेमाल कर सामान बेचने तथा उनके व्यक्तित्व का व्यावसायिक शोषण करने वाली सामग्री को भी हटाने का आदेश दिया।

जस्टिस ज्योति सिंह ने खुशी कपूर की ओर से दायर वाद में अंतरिम राहत की मांग पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। मामला एक्ट्रेस के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा है।

कोर्ट ने कहा कि वह एक्ट्रेस के पक्ष में 'जॉन डो' आदेश भी पारित करेगा। ऐसे आदेश का उद्देश्य उन अज्ञात व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ भी संरक्षण देना है, जो बिना अनुमति संबंधित व्यक्ति की पहचान, नाम, तस्वीर या अन्य व्यक्तित्व तत्वों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

खुशी कपूर की ओर से इंडिया लॉ एलएलपी के साझेदार आसव राजन और आभा शाह पेश हुए।

यह आदेश खुशी कपूर की बहन और एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर के पक्ष में इसी तरह के आदेश के एक दिन बाद आया है। एक समन्वय पीठ ने जाह्नवी कपूर से संबंधित आपत्तिजनक और अनधिकृत सामग्री को हटाने का निर्देश दिया था।

दिल्ली हाईकोर्ट इससे पहले भी कई प्रसिद्ध व्यक्तियों के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा कर चुका है। इनमें एक्ट्रेस तब्बू, क्रिकेटर अभिषेक शर्मा और युवराज सिंह तथा कांग्रेस नेता शशि थरूर और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण शामिल हैं।

कोर्ट ने उद्यमी अमन गुप्ता, अभिनेता अल्लू अर्जुन और मोहनलाल, आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता अनिरुद्धाचार्य, गायक जुबिन नौटियाल, पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर तथा अभिनेत्री काजोल देवगन, अभिनेता आर. माधवन और एनटीआर जूनियर के व्यक्तित्व अधिकारों की भी रक्षा की है। अभिनेता सलमान खान की ओर से भी इसी तरह का वाद दायर किया गया है।

समन्वय पीठें 'द आर्ट ऑफ लिविंग' के संस्थापक श्री श्री रविशंकर, अभिनेता नागार्जुन, अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिनेता अभिषेक बच्चन और फिल्म निर्माता करण जौहर के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के आदेश भी पारित कर चुकी हैं।

पत्रकार सुधीर चौधरी के मामले में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर उनके संबंध में कथित भ्रामक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार वीडियो प्रसारित किए जाने के खिलाफ अदालत का रुख किया था।

इसके अलावा, पॉडकास्ट संचालक राज शमानी के पक्ष में भी कोर्ट ने जॉन डो आदेश पारित किया था। कोर्ट ने उन्हें भारत में, विशेषकर सामग्री निर्माण के क्षेत्र में, एक पहचाना हुआ चेहरा माना था।

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