बिना सुनवाई ओलंपियन कमलेश मेहता को निलंबित करना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट ने किया TTFI का आदेश रद्द
दिल्ली हाईकोर्ट ने टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) द्वारा महासचिव और पूर्व ओलंपियन कमलेश मेहता को निलंबित करने का आदेश रद्द किया। अदालत ने कहा कि फेडरेशन ने उन्हें बिना सुनवाई का मौका दिए कार्रवाई कर प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन किया।
जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस कृष्ण मुरारी को स्वतंत्र जांच प्राधिकारी नियुक्त किया। वह TTFI के कामकाज और उसके पदाधिकारियों के आचरण की जांच करेंगे।
कमलेश मेहता ने 28 जनवरी 2026 को TTFI की कार्यकारी समिति द्वारा पारित उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित कर महासचिव पद से निलंबित कर दिया गया था। यह कार्रवाई आंतरिक जांच लंबित रहने तक के लिए की गई थी।
कमलेश मेहता भारत के जाने-माने टेबल टेनिस खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने 1992 बार्सिलोना ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में कई पदक जीते हैं।
मामला TTFI अध्यक्ष मेघना अहलावत और कमलेश मेहता के बीच चल रहे आंतरिक विवाद से जुड़ा है। दोनों के बीच बैठकों के आयोजन, फेडरेशन के संचालन, वित्तीय फैसलों और कथित प्रक्रियागत अनियमितताओं को लेकर मतभेद हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यकारी समिति ने विवादित प्रस्ताव पारित करने से पहले कमलेश मेहता को कोई नोटिस नहीं दिया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया।
अदालत ने कहा कि TTFI के नियमों में मौजूद प्रावधानों को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के साथ पढ़ा जाना चाहिए।
अदालत ने टिप्पणी की,
“यह ऐसा मामला है, जहां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूरी तरह अभाव रहा और सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया।”
अदालत ने कहा कि किसी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए पदाधिकारी को निलंबित करना केवल उसके अधिकारों को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उन लोगों के प्रतिनिधित्व के अधिकार को भी प्रभावित करता है, जिन्होंने उसे चुना है।
हाईकोर्ट ने कहा,
“ऐसी स्थिति में यह मानना स्वीकार्य नहीं होगा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर किसी व्यक्ति को एकतरफा तरीके से निलंबित किया जा सकता है।”
अदालत ने यह भी कहा कि फेडरेशन के अध्यक्ष और महासचिव के बीच लगाए जा रहे आरोप इस बात पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं कि क्या संस्था खेल, खिलाड़ियों और देश के हित में काम कर रही है।
हाईकोर्ट ने खेल संघों में गुटबाजी और दबाव समूह बनने पर चिंता जताते हुए कहा कि खेल जगत के व्यापक हित के लिए जरूरी है कि राष्ट्रीय खेल महासंघ कानून, नियमों और अदालतों के निर्देशों के अनुसार काम करें।
इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने कमलेश मेहता का निलंबन आदेश रद्द किया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि भविष्य में फेडरेशन के किसी भी पदाधिकारी के खिलाफ होने वाली कार्रवाई जस्टिस कृष्ण मुरारी की जांच के अधीन रहेगी।