दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट से तय जगह पर दुकान लगाने का अधिकार नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया कि प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट के आधार पर स्ट्रीट वेंडर किसी तय या स्थायी जगह पर दुकान लगाने का दावा नहीं कर सकते।
कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि वह पहले यह जांच करे कि अदालत पहुंचे सभी 42 वेंडरों के पास वैध प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट हैं या नहीं। सर्टिफिकेट की पुष्टि होने के बाद ही उन्हें मोबाइल वेंडर के रूप में कारोबार करने की अनुमति दी जाएगी।
मामला 42 वेंडरों की याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि उनके पास प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट हैं और उन्होंने MCD से यह बताने की मांग की थी कि उन्हें किस तय जगह पर सामान बेचने की अनुमति है।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक केवल माणिक चंद का व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया गया और जगदंबा प्रसाद का प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट ही रिकॉर्ड पर मौजूद है।
कोर्ट ने कहा कि 3 फरवरी 2025 के आदेश के जरिए सभी याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया, लेकिन अब तक बाकी याचिकाकर्ताओं की ओर से ऐसा नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान MCD ने कहा कि याचिकाकर्ता अधिक से अधिक मोबाइल वेंडर हो सकते हैं। उनके लिए कोई ऐसी तय जगह चिन्हित नहीं है, जिसे स्थायी रूप से आवंटित किया जा सके।
कोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि तस्वीरों से पता चलता है कि याचिकाकर्ता मोबाइल वेंडर की तरह सामान बेचने के बजाय स्थायी दुकानों की तरह काम कर रहे हैं। इससे फुटपाथ और पैदल चलने की जगह पर अतिक्रमण हो रहा है और इलाके में यातायात भी प्रभावित हो रहा है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि वेंडिंग की जगहों पर साफ-सफाई और स्वच्छता का उचित ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट के आधार पर तय जगह पर वेंडिंग का अधिकार मांग रहे हैं, लेकिन ऐसा दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा कि प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट नियमों और शर्तों के साथ जारी किए जाते हैं और सभी सर्टिफिकेट धारकों को उनका पालन करना होता है।
पीठ ने यह भी कहा कि मौजूदा मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि सभी 42 याचिकाकर्ताओं के पास प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट हैं भी या नहीं। इसलिए MCD को पहले सभी याचिकाकर्ताओं के सर्टिफिकेट की जांच करने का निर्देश दिया गया। जांच में जिनके पास वैध सर्टिफिकेट पाए जाएंगे, उन्हें मोबाइल वेंडर के रूप में कारोबार करने की अनुमति दी जाएगी।
कोर्ट ने वेंडरों के लिए कुछ शर्तें भी तय की। उन्हें अपने काम के लिए इस्तेमाल की जा रही जगह तक ही सीमित रहना होगा और पैदल चलने वालों के रास्ते पर अतिक्रमण या उनके आवागमन में किसी तरह की रुकावट पैदा नहीं करनी होगी।
वेंडरों को अपने आसपास साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखनी होगी। उन्हें अपनी वेंडिंग की जगह के पास कूड़ेदान भी रखना होगा। वे केवल मोबाइल वेंडर के रूप में ही कारोबार कर सकेंगे और अपना प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट किसी दूसरे व्यक्ति को किराये पर या किसी अन्य तरीके से नहीं दे सकेंगे।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वेंडर अपनी जगह पर किसी तरह का स्थायी या अस्थायी निर्माण नहीं कर सकते।
पीठ ने कहा कि जिस याचिकाकर्ता के पास प्रोविजनल वेंडिंग सर्टिफिकेट नहीं है या जो कोर्ट की ओर से तय शर्तों का पालन नहीं करता है, उसे MCD वहां से हटा सकती है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके निर्देश टाउन वेंडिंग कमेटी-II की ओर से स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम, 2014 की धारा 21 के तहत तैयार की जाने वाली किसी भी योजना के अधीन होंगे। वेंडर इस आदेश के आधार पर किसी स्थायी अधिकार का दावा नहीं कर सकेंगे।
इन निर्देशों के साथ दिल्ली हाईकोर्ट ने 42 वेंडरों की याचिका का निपटारा किया।