दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: दुष्कर्म और POCSO मामलों में आरोपी को 'घोषित अपराधी' नहीं कहा जा सकता

Update: 2026-04-16 10:55 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दुष्कर्म (रेप) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आरोपित व्यक्ति को धारा 82 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत “घोषित अपराधी” (Proclaimed Offender) नहीं घोषित किया जा सकता।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी करते हुए एक सत्र अदालत के आदेश में संशोधन किया, जिसमें याचिकाकर्ता को IPC की धारा 376 और POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत मामले में “घोषित अपराधी” घोषित किया गया था।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने कहा कि धारा 82(1) CrPC के तहत फरार आरोपी के खिलाफ उद्घोषणा (proclamation) की कार्यवाही शुरू की जा सकती है, लेकिन “घोषित अपराधी” घोषित करने का अधिकार केवल उन मामलों में है जो धारा 82(4) CrPC में विशेष रूप से सूचीबद्ध हैं।

कोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 376 और POCSO एक्ट की धारा 6 इस सूची में शामिल नहीं हैं, इसलिए ऐसे आरोपी को केवल “घोषित व्यक्ति” (Proclaimed Person) माना जा सकता है।

पूर्व फैसले का हवाला

हाईकोर्ट ने संजय भंडारी बनाम राज्य (2018) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरोपी का अपराध धारा 82(4) में शामिल नहीं है, तो उसे “घोषित अपराधी” नहीं बल्कि “घोषित व्यक्ति” माना जाएगा।

अग्रिम जमानत पर कोर्ट का रुख

अदालत ने याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि वह फरार नहीं है क्योंकि उसने अग्रिम जमानत (anticipatory bail) के लिए आवेदन किया था।

कोर्ट ने श्रीकांत उपाध्याय बनाम बिहार राज्य (2024) मामले का हवाला देते हुए कहा कि केवल अग्रिम जमानत आवेदन दाखिल करना अदालत में पेशी के बराबर नहीं है और इससे धारा 82 CrPC की कार्यवाही नहीं रुकती।

निष्कर्ष

अंत में, दिल्ली हाईकोर्ट ने सत्र अदालत के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को “घोषित अपराधी” नहीं, बल्कि “घोषित व्यक्ति” माना जाएगा। यह फैसला आपराधिक कानून में धारा 82 CrPC की सीमाओं को स्पष्ट करता है।

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