1/3 सजा पूरी करने वाले अंडरट्रायल को रिहाई दें: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आदेश देते हुए कहा कि जिन अंडरट्रायल कैदियों ने संभावित अधिकतम सजा का एक-तिहाई या आधा हिस्सा पूरा कर लिया है, उन्हें राहत दी जानी चाहिए।
जस्टिस गिरीश कठपालिया ने यह निर्देश धोखाधड़ी और प्रतिरूपण के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए दिया।
अदालत ने आदेश की प्रति जिला एवं सेशन जजों, जेल महानिदेशक, दिल्ली हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति और दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश भी दिए।
मामले में आरोपी पर खुद को शौर्य बताकर शिकायतकर्ता और उसकी बेटी से धोखाधड़ी करने का आरोप था।
अभियोजन पक्ष ने व्हाट्सऐप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग और बैंक दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को साबित करने की कोशिश की।
हालांकि, अदालत ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट भ्रामक है, क्योंकि उसमें जिन ऑडियो रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया गया, वे वास्तव में सह-आरोपी से संबंधित थीं न कि वर्तमान आरोपी से।
अदालत ने यह भी चिंता जताई कि मामले में नामजद पांच आरोपियों में से केवल एक को ही गिरफ्तार किया गया जबकि अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। इसे लेकर कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी के रवैये पर गंभीर सवाल उठते हैं।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी पहले से ही अधिकतम सजा (7 वर्ष) के एक-तिहाई से अधिक अवधि जेल में बिता चुका है और मुकदमे की सुनवाई अभी शुरू भी नहीं हुई है।
अदालत ने कहा,
“सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई ऐसे आरोपी जो पहली बार अपराध में शामिल हुए हैं, 1/3 या उससे अधिक अवधि जेल में बिताने के बाद भी बंद हैं, जो चिंताजनक है।”
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाइकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी और साथ ही यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन हो।