एक्टर विवेक ओबेरॉय के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश, डीपफेक के दुरुपयोग पर लगाई रोक

Update: 2026-02-08 12:33 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता एवं उद्यमी विवेक ओबेरॉय के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) की रक्षा करते हुए उनके पक्ष में जॉन डो (अज्ञात व्यक्तियों) के विरुद्ध अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने अभिनेता के हक़ में एक्स-पार्टी ऐड-इंटरिम डायनामिक इंजंक्शन जारी करते हुए कई प्रतिवादियों और अज्ञात डिजिटल इकाइयों को उनके नाम, छवि, आवाज़, हाव-भाव और अन्य विशिष्ट पहचान से जुड़े अधिकारों के दुरुपयोग से रोक दिया है।

न्यायालय ने कहा कि विवेक ओबेरॉय ने प्रथम दृष्टया (Prima Facie) एक मज़बूत मामला स्थापित किया है और सुविधा का संतुलन स्पष्ट रूप से उनके पक्ष में है। अदालत ने यह भी माना कि उनके व्यक्तित्व का निरंतर अनधिकृत शोषण ऐसी अपूरणीय क्षति पहुंचाएगा, जिसकी भरपाई केवल आर्थिक मुआवज़े से संभव नहीं है।

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि वाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, ई-कॉमर्स वेबसाइट्स, वीडियो शेयरिंग पोर्टल्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार सामग्री के माध्यम से अभिनेता के व्यक्तित्व के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग के आरोपों पर दायर किया गया था। इसमें डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड क्लिप्स, भ्रामक विज्ञापन, झूठे समर्थन (फर्जी एंडोर्समेंट) और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स शामिल हैं।

अभिनेता की ओर से पेश अधिवक्ता सना रईस ख़ान ने दलील दी कि इस तरह की गतिविधियां यह झूठा संकेत देती हैं कि अभिनेता संबंधित उत्पादों, सेवाओं या कंटेंट से जुड़े हुए हैं या उनका समर्थन कर रहे हैं, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि, प्रतिष्ठा और बाज़ार मूल्य को गंभीर क्षति पहुंच रही है।

न्यायालय ने विवेक ओबेरॉय के लंबे और प्रतिष्ठित फ़िल्मी करियर, उनके उद्यमशील उपक्रमों तथा परोपकारी कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नाम, आवाज़, छवि और व्यक्तित्व से जुड़े अन्य गुणों पर उनका कॉपीराइट और स्वामित्व हित प्रथम दृष्टया संदेह से परे है।

अदालत ने कहा:

“प्रथम दृष्टया, वादी की आवाज़ सहित सभी गुण आम जनता और मनोरंजन उद्योग में केवल वादी से ही पहचाने जाते हैं। अतः इस स्तर पर वादी को अपने व्यक्तित्व और उससे जुड़े सभी गुणों को अनधिकृत शोषण से बचाने का अधिकार है।”

अदालत ने आगे कहा कि यदि इस चरण पर अंतरिम संरक्षण प्रदान नहीं किया गया, तो वादी की छवि और व्यक्तित्व को होने वाली क्षति वास्तविक और तात्कालिक होगी, जिसकी भरपाई धन से नहीं की जा सकती।

वाद में यह भी प्रार्थना की गई थी कि सभी प्रतिवादियों और जॉन डो इकाइयों को विवेक ओबेरॉय के नाम, छवि और आवाज़ के बिना अनुमति उपयोग से रोका जाए तथा आपत्तिजनक पोस्ट, पोस्टर, वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री को हटाने का निर्देश दिया जाए। अभिनेता ने आरोप लगाया कि कुछ प्रतिवादी फर्जी अकाउंट्स बनाकर उनके नाम से अनधिकृत उत्पाद बेच रहे हैं और AI व डीपफेक तकनीक का उपयोग कर आपत्तिजनक, भ्रामक और कभी-कभी मानहानिकारक सामग्री तैयार कर रहे हैं।

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में समन्वय पीठें आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर, अभिनेता आर. माधवन, एनटीआर जूनियर, सलमान ख़ान, श्री श्री रवि शंकर, नागार्जुन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, फ़िल्म निर्माता करण जौहर, पत्रकार सुधीर चौधरी और पॉडकास्टर राज शमानी के पर्सनैलिटी राइट्स की भी रक्षा कर चुकी हैं।

इस प्रकार, दिल्ली हाईकोर्ट ने विवेक ओबेरॉय के व्यक्तित्व अधिकारों को व्यापक संरक्षण प्रदान करते हुए डिजिटल युग में AI और डीपफेक के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया है।

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