जमानत सुनवाई से पहले अभियोजकों को पूरी जानकारी दें जांच अधिकारी, फाइल के साथ रहें मौजूद: दिल्ली हाइकोर्ट

Update: 2026-02-11 12:16 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि जमानत मामलों की सुनवाई से पहले जांच अधिकारी (IO) अभियोजकों को ठीक से ब्रीफ करें और सुनवाई के दौरान पूरी जांच फाइल के साथ अदालत में मौजूद रहें।

कोर्ट ने उम्मीद जताई कि इस दिशा में जल्द ही ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

जस्टिस गिरिश कथपालिया ने यह टिप्पणी एक हत्या के मामले में आरोपी को बेल देते हुए की। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान न तो जांच अधिकारी और न ही संबंधित थाना प्रभारी (SHO) अदालत में उपस्थित थे जो बेहद चिंताजनक है।

कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक इंस्पेक्टर जरूर पेश हुआ लेकिन वह भी सिर्फ फाइल के पन्ने पलटता रहा और सुनवाई शुरू होने तक अभियोजक को ब्रीफ तक नहीं किया।

जस्टिस कथपालिया ने आदेश में कहा,

“कल ही सभी अभियोजकों को स्पष्ट कर दिया गया था कि विभिन्न बेंचों से स्थानांतरित होकर आई 179 पुरानी जमानत अर्जियों की सुनवाई होनी है और उन्हें तैयार रहना चाहिए। लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा। यहां तक कि आरोपी की ओर से भी कोई वकील मौजूद नहीं था। ऐसे में बेल मामलों को और टालना उचित नहीं होगा।”

कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि आरोपी 22 जुलाई 2018 से न्यायिक हिरासत में है। उस पर सह-आरोपियों के साथ मिलकर मृतक की गला घोंटकर हत्या करने का आरोप है।

हालांकि कोर्ट ने पाया कि पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ केवल पुलिस हिरासत में दिया गया कथित इकबालिया बयान ही रिकॉर्ड पर है और इसके अलावा कोई ठोस सबूत नहीं जुटाया गया।

जस्टिस कथपालिया ने टिप्पणी की,

“जैसा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है, पुलिस को आरोपी की स्वतंत्रता का विरोध करने में कोई विशेष रुचि दिखाई नहीं देती।”

इन परिस्थितियों को देखते हुए दिल्ली हाइकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी। साथ ही अपने आदेश की प्रति दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भेजने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा,

“उम्मीद है कि बेल मामलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जांच अधिकारी सुनवाई से पहले अभियोजक को पूरी तरह ब्रीफ करें और सुनवाई के दौरान पूरी जांच फाइल के साथ अदालत में मौजूद रहें।”

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