दिल्ली पुलिस को सुने बिना करणी सेना प्रमुख को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे सकते: हाईकोर्ट
नए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नियमों के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांग रहे क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत को दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस को सुने बिना प्रदर्शन की अनुमति देने का आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इस मामले में पुलिस जरूरी पक्ष है।
मामले की सुनवाई गुरुवार को जस्टिस अमित महाजन ने की।
यह याचिका जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी लेकिन पीठ के अवकाश पर होने के कारण मामले को जस्टिस अमित महाजन ने सुना।
राज शेखावत ने एडवोकेट हिमांशु शर्मा के माध्यम से याचिका दायर कर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी। प्रदर्शन का उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से अधिसूचित उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम 2026 का विरोध करना और उसके प्रावधानों को लेकर लोगों को जागरूक करना है।
याचिका में कहा गया कि प्रदर्शन के जरिए आरक्षण नीतियों और नए नियमों को लेकर अपनी आपत्तियां तथा शिकायतें सामने रखी जाएंगी। याचिकाकर्ता ने 2026 के विनियमों को वापस लेने की मांग की।
शेखावत ने दिल्ली पुलिस की ओर से 28 अगस्त को भेजे गए उस पत्र को चुनौती दी, जिसमें प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया गया। वैकल्पिक रूप से उन्होंने मांग की कि उनके आवेदन पर दोबारा विचार कर 24 घंटे के भीतर कारण सहित नया आदेश जारी किया जाए।
प्रदर्शन 6 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक प्रस्तावित है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने मामले में जल्द आदेश की मांग की। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस की मौजूदगी और उसका पक्ष सुने बिना प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा,
“प्रदर्शन की तारीख बदल दीजिए। तारीख को लेकर ऐसा क्या है? अगर पुलिस किसी खास तारीख पर सहमत नहीं है तो आप तारीख बदल सकते हैं। मैं उन्हें सुने बिना आपको अनुमति नहीं दे सकता।”
वकील ने जब कहा कि प्रदर्शन की तारीख बदलने पर विचार किया जा सकता है तो कोर्ट ने मामले को सोमवार को संबंधित नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
याचिका के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति इस आधार पर नहीं दी कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 की तैयारियां चल रही हैं और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। पुलिस ने कानून-व्यवस्था और यातायात से जुड़े कारणों का भी हवाला दिया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि पुलिस का यह फैसला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, क्योंकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होना है, जबकि उनका प्रस्तावित प्रदर्शन 6 सितंबर को जंतर-मंतर पर होना है।
याचिका में यह भी कहा गया कि जंतर-मंतर और भारत मंडपम अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं। प्रदर्शन में किसी तरह का जुलूस या मार्च निकालने अथवा भारत मंडपम या ब्रिक्स सम्मेलन से जुड़े किसी स्थान या सुरक्षा मार्ग की ओर जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है।
याचिकाकर्ता ने यह आश्वासन देने की भी पेशकश की कि जंतर-मंतर से कोई जुलूस नहीं निकाला जाएगा और प्रदर्शन में शामिल कोई व्यक्ति भारत मंडपम या सम्मेलन से जुड़े किसी सुरक्षित मार्ग की ओर नहीं जाएगा।
अब मामले की सुनवाई सोमवार को नियमित पीठ के समक्ष होगी। उस दौरान दिल्ली पुलिस का पक्ष सुने जाने के बाद प्रदर्शन की अनुमति को लेकर अदालत आगे फैसला कर सकती है।