समझौते से मुकदमा खत्म होने पर पूरी कोर्ट फीस लौटाना कानूनी अधिकार, अलग अर्जी जरूरी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मुकदमे, प्रति-दावे या अपील का आपसी समझौते के आधार पर निपटारा होने पर पक्षकारों को पूरी कोर्ट फीस वापस पाने का कानूनी अधिकार है। इसके लिए अलग से अर्जी या याचिका दाखिल करने की जरूरत नहीं है।
जस्टिस अनिल खेतरपाल और जस्टिस भरत पाराशर की खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट फीस अधिनियम, 1870 की संशोधित धारा 16 के तहत समझौते के आधार पर मामला खत्म होने पर पूरी कोर्ट फीस वापस करना एक वैधानिक अधिकार है।
खंडपीठ ने कहा,
“समझौते या सहमति से निपटाए गए मुकदमे, प्रति-दावे या अपील पर दी गई पूरी कोर्ट फीस वापस पाना एक वैधानिक अधिकार है। इसलिए मामले के समझौते या सहमति से निपट जाने और अदालत द्वारा इसका प्रमाणपत्र जारी किए जाने के बाद अलग आवेदन या याचिका की जरूरत नहीं होनी चाहिए।”
हाईकोर्ट एक कंपनी हाइटेक एंटरप्राइजेज की ओर से मॉडर्न कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ दायर अपील में कोर्ट फीस वापस करने की मांग से जुड़ी अर्जी पर सुनवाई कर रहा था।
अदालत ने बताया कि दिल्ली सरकार ने 6 मार्च को अधिसूचना जारी कर कोर्ट फीस अधिनियम की धारा 16 में संशोधन किया और पहले लागू धारा 16ए को हटाकर नया प्रावधान लागू किया।
संशोधित प्रावधान के अनुसार, यदि किसी मुकदमे या अपील में पक्षकार किसी भी स्तर पर आपसी सहमति से विवाद का निपटारा कर लेते हैं तो वादी या प्रति-दावा करने वाला पक्ष पूरी जमा कोर्ट फीस वापस पाने के लिए प्रमाणपत्र का हकदार होगा। यह समझौता अदालत की मदद से हुआ हो या पक्षकारों ने खुद किया हो, इससे इस अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह भी जरूरी नहीं है कि समझौता दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 89 में बताए गए किसी तरीके के तहत ही हुआ हो।
खंडपीठ ने कहा कि संशोधित प्रावधान को सीधे पढ़ने पर स्पष्ट है कि कोर्ट फीस वापस पाने का अधिकार उस समय पैदा होता है, जब मामला समझौते या सहमति के आधार पर निपटा दिया जाता है।
अदालत ने निर्देश दिया कि जब भी किसी मामले का समझौते के आधार पर निपटारा हो, चाहे वह धारा 89 के तहत बताए गए तरीकों के जरिए हुआ हो या नहीं, अदालत को मामले का निपटारा करते समय कोर्ट फीस वापस करने का निर्देश देना चाहिए और संबंधित पक्षों को पूरी फीस वापस पाने के लिए प्रमाणपत्र जारी करना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि इससे पक्षकारों को कोर्ट फीस की वापसी के लिए अलग से कार्यवाही शुरू करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को भी निर्देश दिया कि अदालत द्वारा जारी प्रमाणपत्र पेश किए जाने के बाद कोर्ट फीस की वापसी समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
खंडपीठ ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को इस तरह के मामलों में आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि कोर्ट फीस की वापसी के लिए पक्षकारों को अनावश्यक मुकदमेबाजी न करनी पड़े।
अदालत ने अपने आदेश की प्रति हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजने का भी निर्देश दिया, ताकि इसे सभी प्रधान जिला एवं सत्र जजों के बीच प्रसारित किया जा सके।