NDPS Act के तहत जमानत तय करते समय सह-आरोपी का फरार होना ज़रूरी फैक्टर हो सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत पर विचार करते समय फरार सह-आरोपी की मौजूदगी एक ज़रूरी फैक्टर हो सकती है।
जस्टिस सौरभ बनर्जी विदेशी नागरिक द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिस पर 256 ग्राम हेरोइन - जो कि नारकोटिक पदार्थ की कमर्शियल मात्रा है, की बरामदगी से जुड़े एक मामले में आरोप है, जिसमें सह-आरोपी जमानत मिलने के बाद फरार हो गया और अब लापता है।
जमानत देने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सह-आरोपी के फरार होने की स्थिति से आवेदक के न्याय से भागने की संभावना के बारे में जायज़ चिंताएं पैदा होती हैं।
कोर्ट ने कहा,
“कि उसका सह-आरोपी स्थायी जमानत मिलने के बाद लापता है, जिस कारण उसके खिलाफ NBW जारी किया गया। यह भी मामले के तथ्यों में विचार करने के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। सिर्फ इसलिए कि कोई फोटोग्राफिक या वीडियोग्राफिक सबूत नहीं है, यह आवेदक को बेल मांगने में कोई मदद नहीं कर सकता।”
NDPS Act के तहत जमानत धारा 37 के तहत कठोर दोहरी शर्तों द्वारा नियंत्रित होती है जिसके लिए कोर्ट को यह संतुष्ट होना ज़रूरी है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि आरोपी अपराध का दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए कोई अपराध करने की संभावना नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि आवेदक ने यह अपराध तब किया, जब वह पहले से ही NDPS Act के तहत दर्ज अन्य FIR में जमानत पर रिहा था, जो आपराधिक आचरण के लगातार पैटर्न" को दर्शाता है।
कोर्ट ने आगे कहा कि यह एक ऐसा मामला है, जहां सबूत अभी भी चल रहे हैं और अब तक 19 गवाहों में से केवल 2 की ही ट्रायल कोर्ट के सामने जांच की गई।
यह आवेदक का मामला नहीं है कि किसी की वजह से किसी भी तरह की कोई देरी हुई है। यह किसी भी तरह की अत्यधिक देरी का मामला नहीं है और याचिका खारिज की।