जातीय भेदभाव की शिकायत: दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सिफारिशें रद्द कीं

Update: 2026-07-29 06:44 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ जातीय भेदभाव की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) द्वारा जारी सिफारिशों को रद्द किया। अदालत ने यह आदेश तब दिया, जब शिकायतकर्ता ने कहा कि वह इस मामले में अपनी कानूनी लड़ाई केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के समक्ष जारी रखेंगी।

जस्टिस संजीव नरूला दिल्ली पुलिस आयुक्त की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में आयोग की 12 फरवरी और 15 मई को जारी कार्यवाही और सिफारिशों को चुनौती दी गई।

मामला दिल्ली पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक (रेडियो टेक्नीशियन) पद की भर्ती से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनके साथ जाति के आधार पर भेदभाव किया गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना था कि निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाने के कारण वह ट्रेड परीक्षा में असफल घोषित हुईं।

12 फरवरी की सिफारिश में आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता भर्ती की शुरुआती सभी परीक्षाएं पास कर चुकी थीं और ट्रेड परीक्षा में शामिल 71 अभ्यर्थियों में केवल वही असफल घोषित की गईं। आयोग ने कहा कि "भेदभाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता" और उन्हें एक महीने के भीतर दोबारा ट्रेड परीक्षा का अवसर देने की सिफारिश की थी।

इसके बाद 15 मई को आयोग ने दिल्ली पुलिस को ट्रेड परीक्षा की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग, सफल अभ्यर्थियों का श्रेणीवार विवरण और उनकी उत्तर पुस्तिकाएं पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही परीक्षा लेने वाले अधिकारी की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने और अगली सुनवाई पर पुलिस आयुक्त की उपस्थिति पर भी टिप्पणी की थी।

दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में दलील दी कि यह मामला भर्ती परीक्षा के मूल्यांकन से जुड़ा सेवा विवाद है, जिसकी सुनवाई का अधिकार केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के पास है। संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को ऐसे सेवा विवादों की जांच का अधिकार नहीं है।

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से एक शपथपत्र पेश किया गया, जिसमें बताया गया कि उन्होंने इस विवाद को लेकर पहले ही केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में याचिका दायर की और वह आयोग के समक्ष लंबित शिकायत वापस लेंगी।

शिकायतकर्ता के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अब दिल्ली पुलिस की याचिका का आधार ही समाप्त हो गया। इसके साथ ही अदालत ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की 12 फरवरी और 15 मई की सिफारिशों को रद्द कर दिया।

Tags:    

Similar News