दिल्ली हाईकोर्ट ने ICICI बैंक को 3,89,981 रुपये की वह रकम वापस करने का निर्देश दिया, जो एक कारोबारी कंपनी ने गलती से समान नाम वाली दूसरी फर्म के खाते में भेज दी थी। अदालत ने हालांकि रकम पर ब्याज देने की मांग खारिज की।

मामला एक कंपनी से जुड़ा है जिसने खरीदे गए सामान के भुगतान के लिए वी.के. एंटरप्राइजेज को 3,89,981 रुपये भेजने थे। इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से लेनदेन करते समय कंपनी से गलती हो गई और रकम वी.के. ट्रेडर्स के अकाउंट में चली गई।

कंपनी को लेनदेन के बाद अपनी गलती का पता चला। इसके तुरंत बाद उसने वी.के. ट्रेडर्स से संपर्क कर रकम वापस करने का अनुरोध किया। कंपनी ने अपने बैंक इंडियन बैंक को भी इसकी जानकारी दी। इसके बाद इंडियन बैंक ने ICICI बैंक से संपर्क किया, जहां रकम प्राप्त करने वाले वी.के. ट्रेडर्स का अकाउंट है और लेनदेन को वापस करने का अनुरोध किया।

मामले में बताया गया कि इंडियन बैंक ने बाद में ICICI बैंक को रिकॉल-कम-इंडेम्निटी बॉन्ड भी दिया। इसमें प्रमाणित किया गया कि लेनदेन गलती से हुआ और रकम वापस किए जाने तक उसे रोककर रखने का अनुरोध किया गया। इसके बाद ICICI बैंक ने रकम पर रोक लगा दी।

कंपनी का कहना था कि कई बार संपर्क करने और अनुरोध करने के बावजूद रकम वापस नहीं की गई। इसके बाद उसने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

कंपनी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि रकम का हस्तांतरण वास्तविक कारोबारी भुगतान के लिए होना था, लेकिन समान नाम वाली फर्म के कारण यह गलती से वी.के. ट्रेडर्स के अकाउंट में पहुंच गई।

वहीं ICICI बैंक की ओर से कहा गया कि जब बैंक ने वी.के. ट्रेडर्स से इस लेनदेन के बारे में जानकारी मांगी थी तो फर्म ने बैंक को बताया था कि रकम सही तरीके से उसके अकाउंट में ही भेजी गई।

जस्टिस जस्मीत सिंह ने मामले की सुनवाई के दौरान गौर किया कि वी.के. ट्रेडर्स को 18 जुलाई 2024 को यह साबित करने के लिए दस्तावेज दाखिल करने का अवसर दिया गया कि रकम वास्तव में सही तरीके से उसके खाते में भेजी गई। अदालत ने पाया कि दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद फर्म ने इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया और उसकी ओर से अदालत में कोई उपस्थित भी नहीं हुआ।

अदालत ने इंडियन बैंक की ओर से ICICI बैंक के पक्ष में दिए गए क्षतिपूर्ति बांड का भी संज्ञान लिया। इस बांड के जरिए इंडियन बैंक ने रकम वापस किए जाने के कारण ICICI बैंक को होने वाली किसी भी देनदारी, नुकसान या क्षति की भरपाई करने का आश्वासन दिया।

जस्टिस जस्मीत सिंह ने कहा कि यह क्षतिपूर्ति बांड याचिकाकर्ता कंपनी के दावे की वास्तविकता और इंडियन बैंक की ओर से दिए गए सहयोग को दर्शाता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने ICICI बैंक को 3,89,981 रुपये का लेनदेन वापस करने का निर्देश दिया।

कंपनी ने रकम पर ब्याज देने की भी मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मामले में किसी भी प्रतिवादी की गलती सामने नहीं आती है और रकम का गलत खाते में जाना स्वयं याचिकाकर्ता की गलती के कारण हुआ। इसलिए अदालत ने रकम वापस करने का निर्देश तो दिया लेकिन उस पर ब्याज देने से इनकार किया।

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