प्रिया रमानी मानहानि मामला: एम.जे. अकबर की अपील पर 24 सितंबर को अंतिम सुनवाई करेगा दिल्ली हाइकोर्ट

Update: 2026-03-16 09:05 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एम.जे. अकबर द्वारा पत्रकार प्रिया रमानी की बरी होने के खिलाफ दायर अपील को अंतिम सुनवाई के लिए 24 सितंबर को सूचीबद्ध किया। यह मामला उन यौन उत्पीड़न आरोपों से जुड़ा है, जो प्रिया रमानी ने 'मीटू' अभियान के दौरान लगाए।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड प्राप्त हो चुका है और दोनों पक्षों की लिखित दलीलें भी दाखिल की गईं।

अदालत ने कहा,

“मामले को अंतिम सुनवाई के लिए अगली तारीख पर सूचीबद्ध किया जाए।”

यह अपील जनवरी 2022 में स्वीकार की गई।

मामले की शुरुआत अक्टूबर 2018 में हुई, जब एम.जे. अकबर ने दिल्ली कोर्ट में प्रिया रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। यह मुकदमा उस ट्वीट के बाद दायर किया गया था जिसमें रमानी ने 'me too' अभियान के दौरान अपने पुराने लेख का संदर्भ देते हुए बताया था कि उसमें जिस व्यक्ति पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया, वह एम.जे. अकबर थे।

बाद में ट्रायल अदालत ने प्रिया रमानी को बरी करते हुए कहा था कि यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला को दंडित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा था कि प्रतिष्ठा के अधिकार की रक्षा महिला की गरिमा के अधिकार की कीमत पर नहीं की जा सकती।

अपील में एम.जे. अकबर ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने यह मानते हुए भी कि रमानी के ट्वीट मानहानिकारक थे, उन्हें बरी करके गंभीर त्रुटि की है। अपील में कहा गया कि जब अदालत ने यह माना कि लेख और उससे जुड़ा प्रकाशन मानहानिकारक था तब आरोपी को दोषमुक्त करना उचित नहीं था। वहीं इस निर्णय के लिए पर्याप्त कारण भी नहीं दिए गए।

अब दिल्ली हाइकोर्ट इस अपील पर 24 सितंबर को अंतिम सुनवाई करेगा।

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