शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन कपल को सुरक्षा, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- जीवन और स्वतंत्रता सर्वोपरि
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि दो वयस्क अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं तो केवल इस आधार पर उन्हें सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता कि वे पहले से किसी और से शादीशुदा हैं। अदालत ने ऐसे ही एक लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया।
जस्टिस सौरभ बनर्जी की पीठ ने स्पष्ट कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोपरि है और यह सभी नागरिकों को समान रूप से प्राप्त है।
अदालत ने कहा,
“दोनों याचिकाकर्ता वयस्क हैं और भारतीय नागरिक हैं। इसलिए उन्हें संविधान के तहत मिले अधिकारों की सुरक्षा प्राप्त है। वे विवाहित हैं या लिव-इन संबंध में हैं, यह निर्णय के लिए प्रासंगिक नहीं है।”
मामले में याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं लेकिन महिला के परिवार और पति की ओर से लगातार धमकियां और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे वर्ष 2016 से ही पति द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है।
याचिका के अनुसार दोनों फरवरी 2026 से हैदराबाद में साथ रह रहे थे लेकिन स्थानीय स्तर पर दबाव और पुलिस हस्तक्षेप के कारण उन्हें दिल्ली आना पड़ा और हाइकोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगानी पड़ी।
अदालत ने बिना उनके संबंध की वैधता पर टिप्पणी किए कहा,
“दोनों वयस्कों ने सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है, इसलिए उनके जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है।”
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता जरूरत पड़ने पर संबंधित थाना प्रभारी से संपर्क कर सकते हैं और पुलिस उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार किसी भी सामाजिक या वैवाहिक स्थिति से ऊपर है।