दिल्ली हाईकोर्ट ने 'रेस कोर्स मस्जिद' को बचाने की याचिका पर नोटिस जारी किया, केंद्र ने अगली सुनवाई तक इसे न गिराने का भरोसा दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को नमाज़ी की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने 'रेस कोर्स मस्जिद' को गिराए जाने की आशंका जताते हुए इसके संरक्षण की मांग की।
जस्टिस अनीश दयाल ने मामले की सुनवाई गुरुवार के लिए तय करते हुए, केंद्र सरकार (भूमि एवं विकास कार्यालय के ज़रिए) और दिल्ली वक्फ़ बोर्ड से जवाब मांगा।
यह मस्जिद 'रेस कोर्स क्लब' के अंदर स्थित है। यह क्लब प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के पास लगभग 53 एकड़ में फैला हुआ है।
याचिकाकर्ता सैयद अहमद सऊद की ओर से वकील एम. सुफियान सिद्दीकी पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि मस्जिद को गिराए जाने का ख़तरा बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि आने-जाने के रास्ते में रुकावटें पैदा की गई हैं, जिससे नमाज़ी मस्जिद के अंदर नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली वक्फ़ बोर्ड ने इस मामले में ज़रूरी कदम न उठाकर अपने वैधानिक कर्तव्यों की पूरी तरह से अनदेखी की।
सऊद का कहना है कि धार्मिक आचरण के अपने स्वतंत्र अधिकार के तहत, इस मामले में उनकी दिलचस्पी है, लेकिन उन्हें मस्जिद में जाने से रोका जा रहा है।
सिद्दीकी ने बताया कि 1977 से ही सरकारी गजट में इस मस्जिद को 'वक्फ़ संपत्ति' के तौर पर अधिसूचित किया गया। साथ ही, 1 अक्टूबर 2009 की अधिसूचना के तहत इसे 'ग्रेड-II' का दर्जा भी प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि मस्जिद में कोई भी बदलाव करने के लिए 'हेरिटेज कमिटी' (विरासत समिति) की विशेष अनुमति लेनी होगी, तो इसे गिराने का सवाल ही नहीं उठता।
याचिका के अनुसार, मस्जिद को गिराए जाने की आशंका इसलिए है, क्योंकि हाल ही में वहां बिजली और पानी की सुविधा काट दी गई। ऐसा उस परिसर में चल रही तोड़फोड़ की कार्रवाई के चलते किया गया।
दिल्ली वक्फ़ बोर्ड के वकील ने बताया कि 19 अक्टूबर को भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) और अन्य संबंधित अधिकारियों के पास आवेदन (रिप्रेजेंटेशन) दिया गया, जिस पर अभी तक कोई फ़ैसला नहीं लिया गया। सऊद ने भी इस मुद्दे पर L&DO और दिल्ली वक्फ़ बोर्ड को दो आवेदन दिए।
केंद्र सरकार के वकील (CGSC) आशीष दीक्षित ने इस मामले पर निर्देश लेने के लिए समय मांगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली और पानी की सुविधा इसलिए काटी गई ताकि रेस कोर्स इलाके में चल रही तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान, मस्जिद में आने वाले किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा संबंधी कोई ख़तरा न हो। उन्होंने बताया कि संबंधित परिसर में एक मंदिर भी स्थित है और वे इस बारे में भी निर्देश लेंगे।
उन्होंने मौखिक रूप से कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक मस्जिद को गिराने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
Case Title : Syed Ahmed Saud v. Delhi Waqf Board & Ors