अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR पर रोक हटाई गई, हाइकोर्ट का सेशन कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई का निर्देश

Update: 2026-05-20 08:16 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर लगी रोक रद्द की। यह मामला न्यूज़लॉन्ड्री की संपादकीय निदेशक मनीषा पांडे द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि अभिजीत अय्यर मित्रा ने सोशल मीडिया पर उनके और अन्य महिला कर्मचारियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं।

जस्टिस गिरीश कठपालिया ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट को वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद कारण सहित नया आदेश पारित किया जाए।

हाईकोर्ट ने पाया कि सेशन कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते समय कोई ठोस कारण दर्ज नहीं किया था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उस आदेश को टिकाऊ नहीं माना।

दरअसल, ट्रायल कोर्ट ने मनीषा पांडे की शिकायत पर अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि मित्रा के सोशल मीडिया पोस्ट यौन रंग वाली टिप्पणियों की श्रेणी में आते हैं और प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ता की मर्यादा का अपमान करने के उद्देश्य से किए गए प्रतीत होते हैं।

बाद में मित्रा ने इस आदेश को सेशन कोर्ट में चुनौती दी, जहां प्रारंभिक सुनवाई में ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई।

मनीषा पांडे की ओर से सीनियर एडवोकेट नंदिता राव और एडवोकेट बानी दीक्षित ने पक्ष रखा। पांडे की प्रमुख आपत्ति यह थी कि सेशन कोर्ट ने बिना कारण बताए रोक का आदेश पारित कर दिया।

सुनवाई के दौरान मित्रा की ओर से पेश सीनियर वकील ने भी इस बात का विरोध नहीं किया कि सेशन कोर्ट का आदेश कारणयुक्त नहीं है। इसलिए उसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुधवार को मामले के गुण-दोष पर कोई बहस नहीं हुई। अदालत ने दोनों पक्षकारों की सहमति से सत्र अदालत का रोक संबंधी आदेश रद्द करते हुए मामला वापस भेज दिया।

अदालत ने सेशन कोर्ट को निर्देश दिया कि बिना अनावश्यक स्थगन दिए मित्रा की रोक संबंधी अर्जी पर जल्द फैसला किया जाए। साथ ही दोनों पक्षकारों को 22 मई को सत्र अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया।

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