स्टूडेंट एक्टिविस्ट की हिरासत पर सख्त हाईकोर्ट, दिल्ली पुलिस को CBI जांच की चेतावनी
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टूडेंट एक्टिविस्ट की कथित अवैध हिरासत और प्रताड़ना के मामले में दिल्ली पुलिस को कड़ी चेतावनी दी। अदालत ने संकेत दिया कि यदि संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जा सकती है।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने कहा,
“अब काफी हो चुका है, हम इसे यूं नहीं जाने देंगे। जरूरत पड़ी तो जांच CBI को सौंप देंगे।”
अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस का अब तक का रवैया भरोसा पैदा नहीं करता।
अदालत ने दिल्ली पुलिस द्वारा सीलबंद लिफाफे में दाखिल रिपोर्टों, विशेषकर स्पेशल सेल कार्यालय के CCTV से जुड़े विवरणों पर नाराजगी जताई।
खंडपीठ ने टिप्पणी की,
“आप हमें मजबूर कर रहे हैं कि हम कहें कि इस जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता।”
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस को कार्यकर्ताओं पर संदेह था तो कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी था।
अदालत ने कहा,
“संविधान में जो प्रक्रिया तय है हम देखना चाहते हैं कि उसका पालन हुआ या नहीं।”
यह मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया जिसमें आरोप लगाया गया कि पिछले महीने कई स्टूडेंट कार्यकर्ताओं को स्पेशल सेल ने अवैध रूप से हिरासत में लिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जांच गंभीरता से की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर पर जांच कराई जाएगी।
अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह पूरे मामले की फाइल अगली सुनवाई में पेश करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रक्रिया का पालन नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए जा सकते हैं।
पुलिस का कहना है कि वह 13 कार्यकर्ताओं की जांच कर रही है, जिन पर माओवादी या नक्सली विचारधारा से जुड़े होने का संदेह है।