दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर अर्जुन कपूर के उस मुकदमे पर फैसला सुनाया, जिसमें उन्होंने अपने 'पर्सनैलिटी' (व्यक्तित्व) और 'पब्लिसिटी राइट्स' (प्रचार अधिकारों) की सुरक्षा की मांग की थी। यह मामला उनके नाम, इमेज और हुबहू दिखने वाली विशेषताओं के अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल (जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - AI से बना कंटेंट भी शामिल है) के खिलाफ है।

जस्टिस पुरषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि चूंकि किसी भी प्रतिवादी (डिफेंडेंट) ने कोई लिखित बयान दाखिल नहीं किया और न ही मुकदमे में लगाए गए आरोपों का कोई खंडन किया, इसलिए इन आरोपों को 'स्वीकार किया हुआ' माना जाएगा। ऐसे में तथ्य से जुड़ा कोई विवाद नहीं बचता, जिसके लिए किसी ट्रायल (मुकदमे की सुनवाई) की जरूरत हो।

कोर्ट ने कहा,

"चूंकि कोई लिखित बयान या दस्तावेजों को स्वीकार करने/नकारने वाला हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, इसलिए मुकदमे में लगाए गए आरोपों को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा।"

यह मुकदमा अर्जुन कपूर ने कई संस्थाओं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों और अज्ञात लोगों के खिलाफ दायर किया। उनका आरोप है कि इन लोगों ने उनके 'पर्सनैलिटी' और 'पब्लिसिटी राइट्स' का अनधिकृत इस्तेमाल किया।

29 अप्रैल को दिए गए अंतरिम आदेश में कोर्ट ने कई प्रतिवादियों को अर्जुन कपूर की सहमति या अनुमति के बिना उनके नाम, इमेज, हुबहू दिखने वाली विशेषताओं और उनके व्यक्तित्व से जुड़ी अन्य चीजों का इस्तेमाल करने से रोक दिया।

इस रोक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जेनरेटिव AI, मशीन लर्निंग, डीपफेक, फेस मॉर्फिंग और सुपरइम्पोजिशन जैसी तकनीकों के जरिए उनके प्रदर्शन (परफॉरमेंस) का अनधिकृत इस्तेमाल करना भी शामिल है।

कोर्ट ने प्रतिवादियों को ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल करके टी-शर्ट, स्वेटशर्ट, स्टिकर, पोस्टर, मग जैसे उत्पाद बनाने या बेचने, और ऑडियो-विजुअल कंटेंट, तस्वीरें व वीडियो बनाने या फैलाने से भी रोक दिया।

कोर्ट ने कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों को यह भी निर्देश दिया कि वे उल्लंघन करने वाले लिंक को हटा दें और कुछ खास यूट्यूब चैनलों व सोशल मीडिया अकाउंट्स से जुड़ी सब्सक्राइबर्स की बुनियादी जानकारी का खुलासा करें।

सुनवाई के दौरान, अर्जुन कपूर के वकील ने बताया कि कुछ प्रतिवादियों ने पहले ही अंतरिम निर्देशों का पालन किया और अब आगे किसी उल्लंघन की संभावना नहीं है, इसलिए पूरे ट्रायल की कोई आवश्यकता नहीं है।

कोर्ट ने विवादित लिंक और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जांच की और पाया कि इनका इस्तेमाल अर्जुन कपूर की सहमति के बिना व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

'रजत शर्मा और अन्य बनाम तमारा डॉक और अन्य' मामले में अपने पिछले फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मुकदमे में अर्जुन कपूर के पक्ष में फैसला सुनाया जाना चाहिए। अदालत ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार विभाग को निर्देश दिया कि वे प्रतिवादियों में से एक से जुड़े उन उल्लंघनकारी लिंक को हटा दें, जो अभी भी सक्रिय हैं, साथ ही उन अन्य लिंक को भी हटा दें जिनका उल्लेख शिकायत में किया गया।

कई अन्य प्रतिवादियों के संबंध में दिए गए अंतरिम निर्देशों को अंतिम रूप दे दिया गया।

अदालत ने कपूर को यह छूट भी दी कि यदि उन्हें बाद में ऐसे कोई URL या कंटेंट मिलते हैं, जिनमें उनके नाम, शक्ल, इमेज, वॉइस, तस्वीरों, वीडियो या उनके व्यक्तित्व के अन्य पहलुओं का दुरुपयोग या अनुचित इस्तेमाल किया गया हो (जिसमें उनके व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों या पंजीकृत ट्रेडमार्क का उल्लंघन भी शामिल है), तो वे मेटा प्लेटफॉर्म्स और गूगल से संपर्क कर सकते हैं।

संबंधित प्लेटफॉर्म अपनी-अपनी नीतियों के अनुसार ऐसे अनुरोधों की स्वतंत्र रूप से जांच करेंगे। यदि ये प्लेटफॉर्म कपूर के अनुरोधों पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं तो वे उचित निर्देशों के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

Case Title : ARJUN KAPOOR v. ARTIST BOOKING COMPNY & ORS

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