खेल परिसरों का मूल उद्देश्य खेल ही रहे, व्यावसायीकरण सीमित हो: दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी

Update: 2026-04-07 09:46 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने सिरी फोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बढ़ते व्यावसायीकरण पर सुनवाई के दौरान कहा कि व्यावसायीकरण से पूरी तरह परहेज नहीं है, लेकिन ऐसे परिसरों का मूल उद्देश्य खेल गतिविधियां और खिलाड़ियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना ही होना चाहिए।

जस्टिस जस्मीत सिंह ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को खेल परिसर में हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि पिछले एक वर्ष से परिसर में अत्यधिक व्यावसायीकरण हो रहा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर ठेके दिए जा रहे हैं। साथ ही खेल परिसर के समय को रात 8 बजे से बढ़ाकर 1 बजे तक कर दिया गया ताकि व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके।

सुनवाई के दौरान अदालत ने DDA से पार्किंग और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाए।

जस्टिस सिंह ने कहा कि यदि परिसर में पार्टियां या भोज जैसे आयोजन होंगे तो अतिरिक्त वाहनों के कारण खिलाड़ियों को पार्किंग में कठिनाई होगी और खेल गतिविधियां प्रभावित होंगी।

अदालत ने कहा,

“मुख्य उद्देश्य यह है कि लोगों को खेलने के लिए अच्छा वातावरण मिले चाहे वह टेनिस हो, तैराकी हो या अन्य खेल। व्यावसायीकरण एक सीमा तक ठीक है लेकिन प्राथमिक फोकस खेल गतिविधियां ही रहनी चाहिए।”

DDA की ओर से कहा गया कि परिसर में केवल सीमित क्षेत्रों में ही रेस्टोरेंट और छोटे आयोजनों की अनुमति है और शराब परोसने के लिए भी निर्धारित क्षेत्र तय हैं।

अदालत ने यह भी चिंता जताई कि ऐसे आयोजनों से बच्चों और खिलाड़ियों के लिए असुविधा हो सकती है, विशेषकर जब खेल के मैदानों के पास शराब परोसी जाती है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि खेल परिसरों का चरित्र नहीं बदलना चाहिए और व्यावसायीकरण इस तरह होना चाहिए कि खेल गतिविधियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

इसके अलावा, अदालत ने याचिका में संशोधन की अनुमति देते हुए जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और ध्यानचंद स्टेडियम से जुड़े समान मुद्दों पर भी नोटिस जारी किया और भारतीय खेल प्राधिकरण को पक्षकार बनाया।

मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

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