दिल्ली हाईकोर्ट ने नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने के कथित दावों की तथ्यात्मक जांच की मांग वाली जनहित याचिका बुधवार को खारिज की। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में कोई जनहित नहीं है।

यह मामला जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता नितिन नरेश ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने की खबरें सामने आई थीं, जबकि दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज के दावे से इनकार किया। याचिका में इन दोनों दावों के बीच कथित विरोधाभास की तथ्यात्मक जांच कराने की मांग की गई।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने कहा कि जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल इस तरह के मामलों के लिए नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी सवाल किया कि मीडिया में प्रकाशित खबर को किसी दावे का प्रमाण कैसे माना जा सकता है।

कोर्ट ने पूछा कि क्या दिल्ली पुलिस और केंद्रीय पुलिस बलों के आधिकारिक बयानों के बीच कोई विरोधाभास है।

खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा,

“हम ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेंगे... हर तरह के मामले यहां दाखिल किए जा रहे हैं। इसमें कोई जनहित नहीं है।”

याचिका में 20 जुलाई को राजधानी में आयोजित 'संसद चलो' मार्च का भी उल्लेख किया गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित रूप से बल प्रयोग किए जाने और कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने के दावे किए गए।

याचिकाकर्ता ने अपने उस अभ्यावेदन पर कार्रवाई किए जाने की मांग की, जिसमें पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जांच का अनुरोध किया गया। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए इसे खारिज किया।

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