दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि उसके सदस्य हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को छुट्टी पर रहेंगे। यह निर्णय उस व्यवस्था के विरोध में लिया गया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने इन शनिवारों को कार्य दिवस घोषित किया।
बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में कहा कि हाईकोर्ट से कई बार इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया लेकिन कोई बदलाव नहीं किया गया। इसके बाद कार्यकारिणी समिति ने यह कदम उठाया।
प्रस्ताव के अनुसार वकीलों ने शनिवार की सुनवाई से जुड़ी कई व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर ध्यान दिलाया। इनमें अन्य न्यायाधिकरणों, मध्यस्थता कार्यवाही और दिल्ली से बाहर की अदालतों में पेशी के कार्यक्रम प्रभावित होना शामिल है।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था से मामलों की तैयारी मुवक्किलों से मुलाकात और समग्र पेशेवर दक्षता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
प्रस्ताव में कहा गया,
“सभी सदस्य, 4 अप्रैल 2026 से हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को कार्य से अलग रहें। इन दिनों के लिए प्रत्येक अदालत में वैकल्पिक वकील की व्यवस्था की जाएगी।”
साथ ही एसोसिएशन ने हाइकोर्ट प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग दोहराई।
गौरतलब है कि यह व्यवस्था 22 दिसंबर, 2025 को हुई पूर्ण पीठ की बैठक में तय की गई और 15 जनवरी को इसकी घोषणा की गई। इससे पहले भी बार एसोसिएशन ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इस विषय पर वकीलों से कोई परामर्श नहीं लिया गया।