जस्टिस एसके के बच्चों के सरकारी संबंधों पर टकराव का सवाल: केजरीवाल की दलील पर हाईकोर्ट ने जवाब किया रिकॉर्ड

Update: 2026-04-20 08:14 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट में आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ पक्षपात की आशंका को लेकर अपनी दलील दोहराई। उन्होंने कहा कि जस्टिस के बच्चों के केंद्र सरकार से सक्रिय पेशेवर संबंध हैं जिससे हितों के टकराव का प्रश्न उठता है।

मामला शराब नीति प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें केंद्रीय जांच एजेंसी की याचिका पर सुनवाई से जस्टिस शर्मा के अलग होने की मांग की गई। केजरीवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर अपनी जवाबी दलील को रिकॉर्ड पर लेने का अनुरोध किया।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि लिखित दलीलों के बाद इस तरह की अतिरिक्त जवाबी दलील की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। इसके बावजूद जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल की दलील को लिखित प्रस्तुतिकरण के रूप में स्वीकार करते हुए रिकॉर्ड पर ले लिया।

अदालत ने कहा,

“लिखित दलीलों पर जवाब दाखिल करने की अनुमति नहीं होती लेकिन पक्षपात के आरोप को देखते हुए इसे लिखित प्रस्तुति के रूप में रिकॉर्ड पर लिया जा रहा है।”

केजरीवाल ने अपने जवाब में कहा कि टकराव का प्रश्न इस बात से नहीं जुड़ा कि जस्टिस के बच्चों ने इस विशेष मामले में काम किया या नहीं, बल्कि इस बात से जुड़ा है कि उनका केंद्र सरकार के साथ लगातार और सक्रिय पेशेवर संबंध है।

उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसी स्वयं स्वीकार कर रही है कि जस्टिस के बच्चों को सरकारी मामलों में काम मिलता है और वही सरकारी पक्ष इस मामले में अदालत के समक्ष है।

वहीं जांच एजेंसी ने अपने जवाब में कहा कि जस्टिस शर्मा के बच्चों का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और उन्होंने कभी भी इस प्रकरण में कोई भूमिका नहीं निभाई। एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि यदि ऐसे आधार पर जजों को मामलों से अलग किया जाने लगे तो फिर सरकारी मामलों की सुनवाई करना कठिन हो जाएगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने फैसले के उच्चारण को कुछ समय के लिए टाल दिया और कहा कि सभी दलीलों पर विचार किया जाएगा।

यह मामला न्यायिक निष्पक्षता और हितों के टकराव जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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