फर्जी वाहन रजिस्ट्रेशन रैकेट: RTO क्लर्क को अग्रिम जमानत से इनकार, दिल्ली हाईकोर्ट सख्त
दिल्ली हाईकोर्ट ने देशभर में फैले कथित फर्जी वाहन रजिस्ट्रेशन गिरोह से जुड़े एक RTO क्लर्क को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता और जांच के स्तर को देखते हुए यह राहत देना उचित नहीं है।
जस्टिस गिरीश कठपालिया ने आरोपी गौरव भारद्वाज की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज है और मामले की जांच अपराध शाखा कर रही है।
अभियोजन के अनुसार आरोपी हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित RTO कार्यालय में क्लर्क के रूप में तैनात था और वह वाहन चोरी करने वाले गिरोह का अहम हिस्सा था। इस गिरोह का तरीका यह था कि चोरी किए गए वाहनों के चेसिस नंबर से छेड़छाड़ कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनका रजिस्ट्रेशन कराया जाता था। साथ ही, ऐसे वाहनों को दूर-दराज के राज्यों के नंबर दिए जाते थे ताकि पहचान मुश्किल हो सके।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी संबंधित एसडीएम के ईमेल खाते तक पहुंच रखता था और 'वाहन' पोर्टल पर आने वाले ओटीपी हासिल कर फर्जी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अंजाम देता था। आरोप है कि उसने कई रजिस्ट्रेशन निर्धारित समय के बाद भी किए।
राज्य पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामला कई राज्यों में फैला हुआ है और अभी भी कई संदिग्ध पंजीकरणों की जांच जारी है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी फरार है और उससे पूछताछ के लिए हिरासत में लेना जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि तेलंगाना से प्राप्त जानकारी के अनुसार कई रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी पाए गए और सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं थे। कुछ वाहन चोरी के भी पाए गए, जिनके पंजीकरण विवरण में हेरफेर किया गया।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को अग्रिम जमानत देना जांच में बाधा उत्पन्न कर सकता है खासकर जब विस्तृत पूछताछ आवश्यक है।
इसी आधार पर कोर्ट ने अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की।