नाबालिगों को अपराध का 'हथियार' बनाना बढ़ती समस्या: दिल्ली हाइकोर्ट ने तस्करी मामले में अग्रिम जमानत से किया इनकार

Update: 2026-02-13 06:24 GMT

दिल्ली कोर्ट ने महिला को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, जिस पर एक नाबालिग बच्चे की तस्करी कर उसे अवैध शराब के कारोबार में इस्तेमाल करने का आरोप है। हाइकोर्ट ने कहा कि अपराधों में बच्चों का शोषण कर उन्हें हथियार की तरह उपयोग करना समाज के लिए गंभीर और बढ़ता हुआ खतरा है।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गिरिश कठपालिया ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना समाज को गलत संदेश देगा। उन्होंने कहा कि हाल के समय में अपराधों के लिए बच्चों के शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और कठोर अपराधी स्वयं कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

आरोपी महिला के खिलाफ बाल तस्करी और अवैध शराब कारोबार से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। यह मामला दिल्ली आबकारी अधिनियम 2009, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) की धाराओं के अंतर्गत दर्ज है।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उसकी भूमिका केवल बच्चे को दिल्ली लाने तक सीमित थी और ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो कि वह बच्चे को अवैध शराब की बिक्री के उद्देश्य से लाई थी।

वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि महिला अवैध शराब बिक्री के गिरोह में सक्रिय रूप से शामिल थी और इस प्रक्रिया में धन भी प्राप्त करती थी।

दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद हाइकोर्ट ने कहा कि आरोपित अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत पर विचार करने के मानदंड, नियमित जमानत की तुलना में अधिक सख्त और सीमित होते हैं।

हाइकोर्ट ने आरोपी के आपराधिक पूर्ववृत्त का भी उल्लेख किया और कहा कि यह जांच करना आवश्यक है कि क्या उसने इसी प्रकार अन्य बच्चों की भी तस्करी की है। अदालत ने माना कि मामले की गहराई से जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

इसी आधार पर हाइकोर्ट ने महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।

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