पैतृक या विरासत में मिली संपत्ति भी धन शोधन कानून के तहत कुर्क हो सकती है: दिल्ली हाइकोर्ट

Update: 2026-02-20 08:10 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पैतृक या विरासत में मिली संपत्तियां भी धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (PMLA) के तहत कुर्क की जा सकती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में ऐसी संपत्तियों को कोई विशेष छूट नहीं दी गई।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडे़जा की खंडपीठ ने अरुण सूरी द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अपील में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पीतमपुरा स्थित एक आवासीय संपत्ति की कुर्की को चुनौती दी गई।

यह अपील एक्ट की धारा 42 के तहत उस आदेश के विरुद्ध दायर की गई, जिसमें अपीलीय अधिकरण ने जुलाई, 2017 में जारी अस्थायी कुर्की आदेश की पुष्टि की थी।

अरुण सूरी का तर्क था कि उक्त संपत्ति वर्ष 1991 में उनके पिता ने अपनी आय से संयुक्त नाम पर खरीदी थी और उसके अधिग्रहण में उनका कोई आर्थिक योगदान नहीं था। उनका कहना था कि चूंकि संपत्ति कथित अपराध की आय से नहीं खरीदी गई, इसलिए इसे अधिनियम की धारा 2(1)(यू) के तहत कुर्क नहीं किया जा सकता।

वहीं ED की ओर से कहा गया कि वास्तविक अपराध की आय विदेश भेज दी गई और उसका पता नहीं चल पाया। ऐसे में कानून के प्रावधानों के अनुसार समतुल्य मूल्य की संपत्ति के रूप में इस संपत्ति को कुर्क किया गया।

खंडपीठ ने प्रारंभ में ही कहा कि एक्ट की धारा 5 के तहत सक्षम प्राधिकारी को यह अधिकार है कि वह ऐसी संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर सकता है, जिसके बारे में यह विश्वास हो कि वह अपराध की आय है।

अदालत ने कहा कि यदि ED वास्तविक दागी संपत्ति का पता लगाने में असमर्थ है तो वह उसके समतुल्य मूल्य की किसी अन्य संपत्ति को भी कुर्क कर सकता है, भले ही वह स्वयं प्रत्यक्ष रूप से दागी न हो।

अदालत ने स्पष्ट कहा,

“कानून में पैतृक या विरासत में मिली संपत्तियों के लिए कोई अपवाद नहीं बनाया गया, इसलिए वे कुर्की से मुक्त नहीं हैं। यह तर्क कि पैतृक संपत्ति को तब तक कुर्क नहीं किया जा सकता जब तक वह अवैध धन से खरीदी न गई हो कानून की योजना के विपरीत और गलत है।”

इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने अपील खारिज की।

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