अगस्तावेस्टलैंड केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल की जेल से रिहाई की याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (8 अप्रैल) को अगस्तावेस्टलैंड VVIP चॉपर घोटाले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल की याचिका खारिज की। इस याचिका में उन्होंने भारत-UAE प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 17 को चुनौती दी थी जो साल 1999 में हुई थी।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को भी सही ठहराया, जिसमें मिशेल की जेल से रिहाई की अर्जी खारिज की गई थी। मिशेल ने यह अर्जी इस आधार पर दी थी कि वह सात साल की अधिकतम सज़ा काट चुके हैं।
कोर्ट ने कहा,
"हमें इस याचिका में कोई दम नहीं लगता। इसलिए इसे खारिज किया जाता है।"
मिशेल को दिसंबर, 2018 में इसी संधि के तहत दुबई से भारत प्रत्यर्पित किया गया। उन्होंने दलील दी थी कि आम तौर पर अनुरोध करने वाला देश (इस मामले में भारत) किसी प्रत्यर्पित व्यक्ति पर केवल उन्हीं अपराधों के लिए मुकदमा चला सकता है, जिनके लिए प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया। हालांकि, अनुच्छेद 17 भारत सरकार को उन अपराधों के लिए भी मुकदमा चलाने का अधिकार देता है, जो उससे जुड़े हुए हैं।
मिशेल ने संधि के अनुच्छेद 17 को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21, 245 और 253 के विपरीत बताते हुए चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि अनुच्छेद 17 में इस्तेमाल किए गए शब्द उससे जुड़े हुए अभियोजन पक्ष को यह छूट देते हैं कि वह UAE से प्रत्यर्पित किसी भगोड़े के खिलाफ दायर चार्जशीट में अन्य अपराधों और धाराओं को भी शामिल कर लें।
उनका तर्क था कि किसी प्रत्यर्पित व्यक्ति पर केवल उन्हीं अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है, जिनके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया था, न कि उससे जुड़े हुए अन्य अपराधों के लिए।
उन्होंने पिछले साल 7 अगस्त को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 436A के तहत जेल से रिहाई की उनकी अर्जी खारिज की गई थी।
मिशेल को इस घोटाले से जुड़े CBI केस में 18 फरवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई और बाद में 4 मार्च 2025 को ED केस में दिल्ली हाईकोर्ट से भी ज़मानत मिल गई। हालांकि, ज़मानत की शर्तें पूरी न होने के कारण वह अभी भी जेल में ही हैं।
VVIP चॉपर घोटाले में हुए कथित अवैध लेन-देन के लिए मिशेल को बिचौलिया बताया जाता है।
CBI ने आरोप लगाया कि 8 फरवरी, 2010 को 556.262 मिलियन यूरो के VVIP हेलिकॉप्टरों की सप्लाई के लिए जो डील साइन हुई थी, उससे सरकारी खजाने को करीब 398.21 मिलियन यूरो (लगभग 2666 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ था।
इसके बाद ED ने जून 2016 में मिशेल के खिलाफ चार्जशीट फाइल की थी जिसमें आरोप लगाया गया कि उसे अगस्तावेस्टलैंड से 30 मिलियन यूरो (लगभग 225 करोड़ रुपये) मिले थे।