अभिषेक शर्मा ने पर्सनैलिटी राइट्स के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया, अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष हुई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिषेक शर्मा की ओर से पेश वकील को निर्देश दिया कि वह एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करें।
इस हलफनामे में उन आपत्तिजनक सामग्रियों के स्क्रीनशॉट रिकॉर्ड पर लाए जाएं, जो वादपत्र में दी गई तालिकाओं से मेल अकाउंट हों।
सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष आठ इंटरनेट कड़ियों का उल्लेख किया। इनसे संबंधित स्क्रीनशॉट देखने के बाद अदालत ने कहा कि वह ऐसी स्थिति में कोई आदेश पारित नहीं कर सकती, जब आपत्तिजनक कड़ियां वादपत्र के साथ संलग्न तालिका में दिए गए विवरण से मेल नहीं खातीं।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभिषेक शर्मा के पक्ष में आदेश देने के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया जाए।
अदालत ने कहा कि पहले रिकॉर्ड को विधिवत पूरा किया जाए, उसके बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट इससे पहले भी कई प्रमुख हस्तियों के पर्सनैलिटी राइट्स के लिए आदेश जारी कर चुका है। इनमें कांग्रेस नेता शशि थरूर, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, उद्योगपति अमन गुप्ता, अभिनेता अल्लू अर्जुन, मोहनलाल, आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता अनिरुद्धाचार्य, गायक जुबिन नौटियाल, पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर, अभिनेता काजोल, आर. माधवन और एनटीआर जूनियर शामिल हैं। अभिनेता सलमान खान ने भी इसी तरह का वाद दायर किया।
हाईकोर्ट की समन्वय पीठें आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर, अभिनेता नागार्जुन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन और फिल्म निर्माता करण जौहर के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के संबंध में भी आदेश पारित कर चुकी हैं।
इसके अलावा, अदालत ने पत्रकार सुधीर चौधरी के व्यक्तित्व अधिकारों की भी रक्षा की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कथित रूप से भ्रामक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार किए गए वीडियो प्रसारित किए जाने को लेकर राहत मांगी थी।
इसी तरह, पॉडकास्टर राज शमानी के मामले में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ व्यापक निषेधाज्ञा (जॉन डो आदेश) जारी करते हुए कहा था कि वह विशेष रूप से सामग्री निर्माण के क्षेत्र में भारत के एक जाने-माने चेहरे हैं।