देश विरोधी नैरेटिव फैलाने के कारण लगाई गई 4PM चैनल पर रोक: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा

Update: 2026-04-21 13:44 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट में केंद्र सरकार ने 4PM नामक यूट्यूब चैनल पर लगाई गई रोक का बचाव करते हुए कहा कि यह मंच देश विरोधी प्रचार और एकतरफा नैरेटिव फैलाने में लिप्त था। सरकार ने कहा कि चैनल की सामग्री भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक पाई गई।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया कि इस चैनल पर लगातार ऐसी सामग्री प्रसारित की जा रही थी, जो कल्पनाओं, षड्यंत्र सिद्धांतों और भ्रामक तथ्यों पर आधारित थी। सरकार के अनुसार इन वीडियो में भारत की विदेश नीति, रक्षा, आंतरिक सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील विषयों पर एकतरफा और बिना प्रमाण के आरोप लगाए गए।

सरकार ने आरोप लगाया कि चैनल ने भारत की सैन्य कार्रवाई, विदेश नीति और सुरक्षा एजेंसियों को लेकर गंभीर और भ्रामक दावे किए जिससे लोगों में भ्रम और अविश्वास पैदा हो सकता है। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, मणिपुर और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर सामग्री को उकसाने वाली और अस्थिरता फैलाने वाली बताया गया।

केंद्र ने यह भी कहा कि यह केवल कुछ वीडियो का मामला नहीं था बल्कि पूरे चैनल का संचालन एक डिजिटल इको चैंबर की तरह हो रहा था, जहां लगातार एक ही तरह का दृष्टिकोण प्रस्तुत कर जनमत को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। सरकार के अनुसार, यह डिजिटल लॉबिंग का उदाहरण है जिसमें एल्गोरिदम, आर्थिक लाभ और संगठित संदेशों के जरिए विचारधारा को बढ़ावा दिया जाता है।

सरकार ने तर्क दिया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत ऐसे मामलों में पूरे चैनल को ब्लॉक करना ही उचित और प्रभावी उपाय है, क्योंकि अलग-अलग वीडियो हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

यह याचिका चैनल के संपादक संजय शर्मा और '4PM न्यूज नेटवर्क' द्वारा दायर की गई, जिसमें चैनल को बहाल करने और सभी सामग्री पुनः उपलब्ध कराने की मांग की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि 12 मार्च को यूट्यूब ने एक कानूनी अनुरोध के आधार पर चैनल को ब्लॉक किया था।

मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जारी है और अब कोर्ट इस पर आगे निर्णय करेगा।

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