सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 17 से 19 दिसंबर 2021 के बीच हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में कथित रूप से नफरत भरे भाषण देने के मामले में जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी को जमानत दे दी।
जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने वसीम रिजवी को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी। एक शर्त यह भी है कि वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बात न करे।
पीठ ने कहा कि मामले में सह-आरोपी को जमानत दे दी गई है और पुलिस ने जांच के बाद आरोपपत्र दायर किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 29 अगस्त को मेडिकल आधार पर 17 मई को दी गई अंतरिम जमानत को 3 महीने के लिए बढ़ाने से इनकार कर दिया था और त्यागी को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था। आज त्यागी की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने पीठ को सूचित किया कि त्यागी ने पिछले आदेश के अनुसार आत्मसमर्पण कर दिया है।
पीठ ने त्यागी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर भी नोटिस जारी किया जिसमें बाद की एफआईआर को क्लब करने की मांग की गई थी। त्यागी को इस साल 13 जनवरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 298 के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।
जस्टिस रवींद्र मैथानी की एकल पीठ ने त्यागी को यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था कि त्यागी ने बेहद अपमानजनक टिप्पणी की।
अदालत ने कहा,
"पैगंबर के साथ दुर्व्यवहार किया गया है, यह एक विशेष धर्म के लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा है, यह युद्ध छेड़ने का इरादा है। यह दुश्मनी को बढ़ावा देता है। यह एक अभद्र भाषा है।"
जितेंद्र त्यागी को पहले वसीम रिजवी के नाम से जाना जाता था, जो यूपी शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष था। पिछले साल दिसंबर में त्यागी ने हिंदू धर्म अपना लिया और जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी नाम स्वीकार कर लिया।
जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिज़वी बनाम उत्तराखंड राज्य - एसएलपी (सीआरएल) 3304/22
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