राज्यपालों के लिए समयसीमा तय हो, 'वन नेशन, वन लैंग्वेज' नीति छोड़ी जाए: कुरियन जोसेफ समिति ने सुझाए संघीय सुधार
तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने संघ–राज्य संबंधों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। रिपोर्ट में राज्यों की स्वायत्तता में लगातार हो रहे क्षरण को रोकने के लिए व्यापक संवैधानिक और संस्थागत सुधारों का प्रस्ताव किया गया है। समिति का गठन अप्रैल 2025 में राज्य स्वायत्तता से जुड़े सिद्धांतों का अध्ययन करने के लिए किया गया था।
समिति में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी एम. अशोक वर्धन शेट्टी और पूर्व योजना आयोग उपाध्यक्ष प्रो. एम. नागनाथन भी सदस्य थे। जस्टिस जोसेफ ने बिना पारिश्रमिक यह पद स्वीकार किया था।
बढ़ते केंद्रीकरण पर चिंता
समिति ने कहा कि भारत में संघीय ढांचा अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे संस्थागत और प्रशासनिक बदलावों के माध्यम से कमजोर हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि संघवाद केवल शक्तियों का विभाजन नहीं, बल्कि भाषा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कराधान और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी जीवंत संवैधानिक व्यवस्था है। समिति ने एस.आर. बोम्मई मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने संघवाद को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना है, फिर भी व्यवहार में इसे प्रशासनिक सुविधा तक सीमित किया जा रहा है।
समिति ने अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन प्रक्रिया की लचीलापन और अनुच्छेद 3 के तहत संसद की राज्यों की सीमाओं को बदलने की शक्ति पर भी चिंता जताई। राज्यपालों की भूमिका, शिक्षा-स्वास्थ्य में केंद्रीकरण और GST व्यवस्था में केंद्र की बढ़ती पकड़ को भी राज्यों की स्वायत्तता के लिए चुनौती बताया गया।
राज्य विधेयकों पर समयबद्ध स्वीकृति
समिति ने अनुच्छेद 200 और 201 में संशोधन कर राज्यपाल द्वारा विधेयकों पर कार्रवाई के लिए कड़ी समय-सीमा तय करने की सिफारिश की:
राज्यपाल 15 दिनों के भीतर निर्णय लें
पुनः पारित विधेयक पर 15 दिनों में अनिवार्य स्वीकृति
समयसीमा न मानने पर स्वीकृति स्वतः मानी जाए
राष्ट्रपति के पास विधेयक भेजना केवल सीमित परिस्थितियों में हो
राज्यपाल की शक्तियों पर नियंत्रण
रिपोर्ट में राज्यपाल पद के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। प्रमुख सुझाव:
राज्य विधानसभा द्वारा अनुमोदित तीन नामों में से राज्यपाल की नियुक्ति
एक बार का, निश्चित पाँच वर्षीय कार्यकाल
हटाना केवल विधानसभा के प्रस्ताव से
सरकार गठन के लिए स्पष्ट नियम और 7 दिन में फ्लोर टेस्ट
विधानसभा सत्र बुलाने में देरी पर रोक
राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (Chancellor) के रूप में भूमिका समाप्त
“वन नेशन, वन लैंग्वेज” का विरोध
समिति ने भाषाई विविधता की रक्षा पर जोर देते हुए कहा कि हिंदी थोपने का प्रयास संघवाद के विपरीत है। प्रमुख सिफारिशें:
अंग्रेज़ी को स्थायी रूप से संघ की आधिकारिक भाषा बनाना
आठवीं अनुसूची की सभी भाषाओं को संघ की आधिकारिक भाषा घोषित करना
अंग्रेज़ी को स्थायी संपर्क भाषा बनाए रखना
एक मिलियन से अधिक वक्ताओं वाली सभी भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करना
तीन-भाषा सूत्र की जगह अंग्रेज़ी + क्षेत्रीय भाषा आधारित द्विभाषी प्रणाली
संविधान संशोधन प्रक्रिया में बदलाव
समिति ने अनुच्छेद 368 में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव रखा:
संसद के प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई बहुमत से संशोधन
अधिकांश संशोधनों के लिए दो-तिहाई राज्यों की मंजूरी आवश्यक
मूल संरचना सिद्धांत को संविधान में शामिल करना
संशोधन विधेयक से पहले सार्वजनिक परामर्श अनिवार्य
राज्यों की सीमाओं पर संसद की शक्ति सीमित करने का प्रस्ताव
किसी राज्य के पुनर्गठन के लिए संबंधित राज्य की सहमति या जनमत संग्रह
राष्ट्रपति शासन के दौरान कोई क्षेत्रीय पुनर्गठन नहीं
नए केंद्र शासित प्रदेश बनाने पर रोक
परिसीमन (Delimitation) 2126 तक स्थगित करने की सिफारिश
समिति ने 1971 की जनगणना आधारित सीट आवंटन को 2126 तक बनाए रखने का सुझाव दिया। साथ ही:
परिसीमन आदेश लागू होने से पहले विधायी समीक्षा
अलग-अलग संघ और राज्य परिसीमन आयोग
राज्यसभा में सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व
अलग चुनाव आयोग और “वन नेशन, वन इलेक्शन” का विरोध
लोकसभा चुनाव के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग
राज्य विधानसभा चुनाव के लिए स्वतंत्र राज्य चुनाव आयोग
एक साथ चुनाव प्रस्ताव (129वां संशोधन विधेयक, 2024) वापस लेने की मांग
दलबदल करने वालों पर 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने पर रोक
मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने की सिफारिश
शिक्षा और स्वास्थ्य राज्यों को वापस
समिति ने 42वें संविधान संशोधन को पलटते हुए शिक्षा को पुनः राज्य सूची में डालने का सुझाव दिया। साथ ही:
NEET और NExT समाप्त करने का प्रस्ताव
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) भंग करने की सिफारिश
केंद्रीय नियंत्रण कम कर राज्यों को अधिक अधिकार
GST सुधार और वित्तीय स्वायत्तता
समिति ने GST परिषद में केंद्र के प्रभुत्व को कम करने की सिफारिश की:
परिषद की सिफारिशों को सलाहात्मक (advisory) माना जाए
राज्यों को SGST दरों में सीमित बदलाव की अनुमति
स्वतंत्र GST विवाद निपटान प्राधिकरण
“वन प्रोडक्ट, वन रेट” सिद्धांत लागू करना