गैंगस्टर कानूनों की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, कई राज्यों के कानून दायरे में
सुप्रीम कोर्ट ने संगठित अपराध से जुड़े कानूनों की वैधता को लेकर अहम याचिका को तीन जजों की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अदालत ने कहा कि इस मामले का असर उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर एक्ट के साथ-साथ गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों के समान कानूनों पर भी पड़ेगा।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने समाजवादी पार्टी नेता इरफान सोलंकी की याचिका पर यह आदेश पारित किया। मामले की अंतिम सुनवाई 21 मई को होगी।
याचिका में उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1986 की कई धाराओं और 2021 के नियमों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई। दावा किया गया कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 20(2) और 21 का उल्लंघन करते हैं।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस मामले का असर अन्य राज्यों के संगठित अपराध कानूनों पर भी पड़ेगा। इसी कारण कोर्ट ने इन राज्यों के एडवोकेट जनरल को भी अगली सुनवाई में उपस्थित रहने को कहा है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया, क्योंकि यह तर्क दिया गया कि गैंगस्टर कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 से टकराता है, जो “संगठित अपराध” को परिभाषित करती है।
]याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि गैंगस्टर एक्ट में किसी व्यक्ति को मात्र आरोपों के आधार पर गैंगस्टर मान लिया जाता है, जिससे निष्पक्ष सुनवाई के मूल सिद्धांत निर्दोषता की धारणा कमजोर हो जाती है। यह भी आरोप है कि इस कानून के तहत दोहरी कार्रवाई संभव हो जाती है, जो अनुच्छेद 20(2) के खिलाफ है।
याचिका में यह भी कहा गया कि कानून पुलिस और प्रशासन को अत्यधिक विवेकाधिकार देता है, जिससे मनमानी कार्रवाई लंबी हिरासत, सख्त जमानत शर्तें और संपत्ति कुर्की जैसे कठोर परिणाम सामने आते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इसी तरह के अन्य मामलों को भी इस याचिका के साथ जोड़ा जाए ताकि एक व्यापक और एकरूप फैसला दिया जा सके।