एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन के लिए अपील करने वालों के खिलाफ यूपी सरकार की सख्त कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रूख किया

Update: 2021-04-28 09:30 GMT

एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। गोखले ने कोर्ट से यूपी सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से रोकने की मांग की है जो सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन की आपूर्ति और अन्य चिकित्सकीय सहायता के लिए अपील कर रहे हैं।

एक्टिविस्ट साकेत गोखले स्वच्छ से सेवा करने वाले लोगों की सुरक्षा भी चाहते हैं जो फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप सहित सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर ऑक्सीजन की आपूर्ति और दवा की उपलब्धता के बारे में जानकारी एकत्र करके COVID-19 रोगियों और उनके परिवारों की मदद कर रहे हैं।

याचिका में कहा गया है कि,

"सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन के लिए एसओएस कॉल करने वाले गंभीर रोगियों के परिवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करना राज्य की शक्तियों का दुरुपयोग है और यह गैर-कानूनी कार्रवाई सरकार की छवि को बनाए रखने और COVID-19 महामारी से निपटने में सरकार की नाकामी की आलोचना से बचाने के लिए की जा रहा है। इसके साथ ही राज्य में सबकुछ ठीख है ऐसी गलत तस्वीरें पेश की जा रही हैं।"

गोखले का कहना है कि हाल ही में यूपी में अमेठी पुलिस ने झूठी सूचना फैलाने के आरोप में आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत एक लड़के पर मुकदमा दर्ज किया। हालांकि सच्चाई यह है कि आरोपी ने अपने दादा की जान बचाने के लिए ट्विटर पर ऑक्सीजन की आपूर्ति की मांग की थी।

गोखले ने तर्क दिया कि भारत के प्रत्येक व्यक्ति को गारंटीकृत प्राप्त भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को छीन लिया गया है।

याचिका में कहा गया कि,

"COVID-19 रोगियों के परिवार वालों को झमकी देना जो ऑक्सीजन की कमी का सामना कर रहे हैं जिनके जीवन और मृत्यु का मामला है यह COVID-19 रोगियों के परिवारों के बीच भय पैदा करता है और यह रोगियों तक मदद पहुंचने से रोक रहा है जो जीवन को बचा सकता है। राज्य इस तरह से लोगों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं कर सकता है और लोगों को बोलने और जीवन की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता है।"

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फेंस में कहा था कि राज्य में किसी भी निजी या सार्वजनिक COVID-19 अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है और सोशल मीडिया पर इस तरह के गलत अफवाह फैलाने वाले लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

आदित्यनाथ ने अफवाहें फैलाने वाले लोगों पर निगरानी रखने के लिए उच्च रैंक के पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए और इस तरह की सभी घटनाओं की विधिवत जांच कर यह देखने के लिए कि क्या डर पैदा करने के लिए यह किया गया है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को ही इस बात पर ध्यान दिया था कि राज्य में मेडिकल ऑक्सीजन की भारी कमी है और राज्य में सरकारी और निजी COVID अस्पतालों और कार्यरत ऑक्सीजन प्लांट पर सरकार से रिपोर्ट मांगी थी।

कोर्ट ने कहा कि,

" हमारी आजादी के सात दशक बाद भी इतने भारी उद्योग लगाने के बावजूद भी अगर हम अपने नागरिकों को ऑक्सीजन नहीं दे पा रहे हैं तो यह शर्म की बात है।"

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