मुजफ्फरनगर: 22 डेथ सेंटेंस सुनाने वाले जज की कोर्ट से 97 गंभीर मामले वापस, जिला जज करेंगे सुनवाई
मुजफ्फरनगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत में लंबित हत्या और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े 97 मामलों को वापस ले लिया गया है। इनमें ऐसे अपराध भी शामिल हैं, जिनमें मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान है।
इन मामलों को वापस लेने का प्रशासनिक आदेश मुजफ्फरनगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह ने जारी किया है। अब इन मामलों की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में होगी।
चार महीने में 10 मामलों में 22 मौत की सजा
97 मामलों को वापस लिए जाने का घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच जज रवि कुमार दिवाकर ने 10 अलग-अलग मामलों में कुल 22 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है।
इनमें 6 अप्रैल को अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या के मामले में तीन आरोपियों को, 28 अप्रैल को एक अन्य हत्या मामले में चार आरोपियों को तथा 30 मई को महिला और उसके छह वर्षीय बेटे की हत्या के मामले में एक आरोपी को मृत्युदंड शामिल है।
इसके बाद 20 जून को दो, 2 जुलाई को एक, 6 जुलाई को दो और 17 जुलाई को चार आरोपियों को अलग-अलग हत्या के मामलों में मौत की सजा सुनाई गई।
12 अगस्त को करीब 27 साल पुराने अपहरण और फिरौती के लिए हत्या के मामले में एक आरोपी को, जबकि 13 अगस्त को 12 साल पुराने हत्या के मामले में चार आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया गया। इस तरह 13 अगस्त तक उनकी अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजाओं की संख्या 22 हो गई।
97 मामलों को वापस लेने की वजह नहीं बताई गई
प्रशासनिक आदेश में 97 मामलों को वापस लेने का कोई कारण नहीं बताया गया है। इसलिए इन मामलों को वापस लिए जाने और जज दिवाकर द्वारा हाल में बड़ी संख्या में मृत्युदंड सुनाए जाने के बीच किसी संबंध का आधिकारिक रूप से दावा नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि Sessions Court द्वारा सुनाई गई death sentence अंतिम नहीं होती। इसे लागू करने से पहले संबंधित High Court द्वारा इसकी पुष्टि आवश्यक होती है।
Gyanvapi मामले से भी चर्चा में आए थे जज दिवाकर
जज रवि कुमार दिवाकर नवंबर 2025 से मुजफ्फरनगर में पदस्थ हैं। इससे पहले वाराणसी में सिविल जज के रूप में कार्यरत रहते हुए उन्होंने 2022 में Gyanvapi परिसर के videographic survey का आदेश दिया था।
मार्च 2024 में बरेली के एक मामले में उनकी कुछ टिप्पणियों को लेकर भी विवाद हुआ था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सत्ता में एक “religious person” का उदाहरण बताया था और उनकी तुलना प्लेटो के 'Philosopher King' से की थी।
बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों को expunge कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि न्यायिक अधिकारियों को अपने आदेशों में व्यक्तिगत या preconceived notions और राजनीतिक रंग वाली टिप्पणियों से बचना चाहिए।
जज दिवाकर की सुरक्षा को लेकर भी जून 2024 में एक NIA Court के Special Judge ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के Registrar General को पत्र लिखा था।
फिलहाल 97 मामलों को वापस लेने के प्रशासनिक आदेश में इसके पीछे कोई कारण दर्ज नहीं किया गया है।