लोकसभा ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया, परीक्षा में धांधली पर न्यूनतम 5 साल की जेल का प्रावधान
लोकसभा ने बुधवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026) को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
विधेयक में परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और संगठित नकल पर कड़े दंड, समयबद्ध जांच और सुनवाई तथा मामलों के निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का प्रावधान किया गया है।
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन करता है। केंद्र सरकार ने इसे देशभर में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों और छात्र आंदोलनों के बाद पेश किया था।
संशोधन के तहत परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर न्यूनतम सजा 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष और अधिकतम सजा 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दी गई है। वहीं, अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दिया गया है।
परीक्षा से जुड़े सेवा प्रदाताओं (Service Providers) के लिए अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ किया गया है। साथ ही, उन्हें सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से प्रतिबंधित किए जाने की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है।
यदि किसी संस्था के निदेशक या वरिष्ठ प्रबंधन की संलिप्तता पाई जाती है, तो उन्हें कम से कम 5 वर्ष की कैद और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का सामना करना होगा।
विधेयक में संगठित परीक्षा अपराधों के लिए भी सजा कड़ी की गई है। ऐसे मामलों में न्यूनतम सजा 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष तथा न्यूनतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है।
तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विधेयक में दो महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य किया गया है। केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने का भी अधिकार दिया गया है।
इसके अलावा, प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को संबंधित हाईकोर्ट से परामर्श कर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित करनी होगी। इन अदालतों में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर रोजाना सुनवाई कर मुकदमे का निपटारा करने का प्रावधान है।
अधिनियम के तहत लंबित सभी मामले भी इन फास्ट ट्रैक अदालतों को स्थानांतरित किए जाएंगे।
विधेयक में अपील की अलग व्यवस्था भी की गई है। विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों के खिलाफ संबंधित हाईकोर्ट की खंडपीठ (Division Bench) में अपील की जा सकेगी, जिसका यथासंभव तीन महीने के भीतर निस्तारण किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों ने सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को प्रभावित किया है।
इन संशोधनों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।